लोग गुस्से में फोन क्यों पटकते है? वजह जान कर चौंक जाएंगे

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लोग गुस्से में फोन क्यों पटकते है? वजह जान कर चौंक जाएंगे

जब हम बहुत गुस्से में होते हैं तो अक्सर कई लोगों का सबसे पहला निशाना मोबाईल फोन या रिमोट ही होता है। गुस्से के उस पल शायद समझ ही चली जाती है, लेकिन बाद में भर–भर के पछतावा होता है, इस से न सिर्फ पैसों का नुकसान होता है, बल्कि आपके समय, डाटा, और काम का भी नुकसान होता है। तो हम आखिर ऐसा करते क्यों हैं? आइए, गुस्से में होने पर अपने प्यारे गैजेट्स को तोड़ने की हमारी इच्छा के पीछे के कारणों का पता लगाएं।

 

क्या चीज़ मजबूर करती है?

हमारे स्मार्टफोन सिर्फ गैजेट नहीं हैं; वे हमारे ही हिस्सों की तरह बन चुका हैं। कोई भी ऐसी चीज जो हमारे गुस्से को। ट्रिगर करती है- ऐसे में हम महसूस करते हैं कि हमारे दिमाग पर प्रेशर बढ़ रहा है। हमारे दिमाग का Amygdala (भावना केंद्र) सक्रिय हो जाता है। हमारा शरीर प्रतिक्रिया करता है: ब्लडप्रेशर बढ़ता है, मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, और तनाव वाले हार्मोन बढ़ने लगते हैं। हमारे अंदर एक तूफ़ान बनने लगता है, जो फूटने को तैयार होता है। ऐसे में हम अपने हाथों में आसानी से आने वाली सबसे पास की चीजों जैसे फोन या रिमोट को तोड़ बैठते है।

लेकिन जब एक बार एड्रेनालाईन कम हो जाता है, तो पछतावा हावी होने लगता है। हम हुए नुकसान को देखते हैं – फोन पर पड़ी दरारें और टूटे हुए टुकड़े – और महसूस करते हैं कि हमारे गुस्से ने हमें कंट्रोल कर लिया। हमने समझदारी से काम लेने के बजाय गुस्से के आगे घुटने टेक बेवकूफी से काम लिया और अब उसके अंजाम सामने देखे जा सकते हैं।

parts of brain

विज्ञान क्या कहता है?

न्यूरोसाइंटिस्ट का कहना है कि गुस्सा हमारे दिमाग के रेशनल पार्ट “prefrontal cortex” पर कब्ज़ा कर लेता है। ऐसे में, हम भविष्य के बारे में सोचने की बजाय तुरंत बेहतर महसूस करने की अधिक परवाह करते हैं। क्रिटिसाइज करने की प्रवृत्ति लॉजिक से ज्यादा हो जाती है। तो, हमारा फोन, वहीं और हाथ के सबसे करीब होने की वजह से, हमारे गुस्से का निशाना बन जाता है।

दिमाग का प्लेजर कैमिकल डोपामाइन भी इसमें शामिल हो जाता है। जब हम गुस्से में कुछ तोड़ते हैं, तो हमारा दिमाग हमें इनाम के रूप में डोपामाइन रश देता है। जिससे एक अजीब तरह की संतुष्टि मिलती है।

और जरूरी नहीं, की जो एक बार हुआ है, वो फिर नहीं होगा। हर बार जब हम अपने फोन को नुकसान पहुंचाते हैं, तो आगे ऐसा और दुबारा करने के चांसेस और बढ़ जाते है, जिससे छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है। हम गुस्सा करने, चीज़ों को तोड़ने और उसके बाद पछताने के पैटर्न में फंस जाते हैं। यही कारण है कि इससे निपटने के बेहतर तरीके खोजना – जैसे कि होशियार रखना, एक्सरसाइज करना, या किसी से बात ही कर लेना – ऐसे में काम आ सकता है।

is it okay to be Angry Without Feeling Bad?

आप क्या कर सकते है?

1. 🧘‍♂️ रुके और गहरी सॉस लें: अगली बार जब आपको लगे कि आपके गुस्से के कारण आपका फ़ोन टूट सकता है, तो थोड़ा रुकें, और गहरी साँस लें।

2. 🤔 खुद से करें सवाल: अपने अंदर भावनाओं के तूफ़ान को पहचानें। अपने आप से पूछें: आखिर मैं क्या कर रहा/रही हूं? क्या मैं अपने गुस्से को फोन पर जाहिर करने के बजाय उससे निपटने का कोई असरदार तरीका ढूंढ सकता/सकती हूं? एक कदम पीछे हटने और सोचने से आपको मुश्किल समय में बेहतर ऑप्शन चुनने में मदद मिल सकती है।

3. 🏋️ अपने गुस्से को स्वस्थ तरीके से व्यक्त करें: गुस्से को व्यक्त करने के कई स्वस्थ तरीके हैं, जैसे एक्सर्साइज, जर्नलिंग, या किसी विश्वास पात्र दोस्त या थैरेपिस्ट से बात करना।

4. 🩺 प्रोफेशनल का ले सहारा: किसी थेरेपिस्ट से मिलना या किसी सपोर्ट ग्रुप में शामिल होने पर विचार करें। वे आपको यह समझने में मदद कर सकते हैं कि आप इतना गुस्सा क्यों महसूस करते हैं और आपको इसे संभालने के बेहतर तरीके सिखा सकते हैं। अपने गुस्से को नियंत्रित करने के लिए पॉजिटिव कदम उठाने से आप अधिक बैलेंस और परिपूर्ण जिंदगी जी सकते हैं।

अगली बार शायद हम अपने गुस्से का सारा पहाड़ छोटे से फोन में तोड़ने के बजाय एक्सर्साइज जैसी चीजों में निकल सकते है। फिर शायद हम अपने फ़ोन को तोड़ने के बजाय, अपनी स्क्रीन और दिल दोनों को ठीक करना सीख सकते हैं।


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