Budget Smartphone vs Flagship Smartphone: ज़रूरत नहीं आपको खरीदने की iPhone, Samsung or Pixel 

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Budget Smartphone vs Flagship Smartphone: ज़रूरत नहीं आपको खरीदने की iPhone, Samsung or Pixel

Budget Smartphone vs Flagship Smartphone: ज़रूरत नहीं आपको खरीदने की iPhone, Samsung or Pixel

दोस्तों, मार्केट में 1 लाख, 1.5 लाख, यहाँ तक की अब तो 2 लाख के भी Luxurious फाेन आते है। और जिन लोगों ने इन फोनों को रखा हुआ है, उनमें से 95% लोगों को पता भी नहीं होता की ये फ़ोन उन्होंने आखिर रखा क्यों है। और जो उस फ़ोन के Pro Features या Performance होती है, वो उनका ना इस्तेमाल करते है, ना उनके कोई काम आती है। वे लोग, 1.5 लाख बेहद बेसिक फ़ोन यूसेज के लिए रखते है, जो की एक 15 हज़ार का फ़ोन भी कर सकता है। और इस तरह Luxurious Phone वो केवल नाम मात्र के लिए ही रह जाता है।

कम्पनी हमें इस तरह बहका देती है की हम Luxurious चीज़ें खरीदें, Luxurious Smartphone रखें। इसे A Pseudo Rich कहते है, जिसमें कुछ इस तरह से आपका दिमाग घुमाया जाता है, कि आप इस महंगे phone को लेने के लिए मजबूर हो जाते है, अब भले ही वो फ़ोन आपके काम का हो या नहीं।

अब मैं एक उदाहरण के रूप में आपको बताता हूं। तो एक बेसिक फ़ोन और फ़्लैगशिप फ़ोन में अंतर तो है, लेकिन जो एक फ़ोन का बेसिक काम होता है, 95% दोनों में एक जैसा ही है। WhatsApp, कॉल करना, मैसेज करना, फोटो खींचना, छोटी मोटी गेमिंग कर लेना या डेली वर्क कर लेना, ये सारे छोटे–छोटे काम एक 15 हज़ार के फ़ोन पर भी हो रहे है और एक 1.5 लाख के फ़ोन पर भी हो रहे है।

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मेन अन्तर क्या है?

तो मैं सबसे पहले मैं आपको Main Difference के बारे में बताता हूं, की क्यों यह फोन यूज़लेस है।

1. Display

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इसमें कोई शक नहीं है जो फ्लैगशिप या प्रीमियम फ़ोन होता है, उसकी डिस्प्ले किसी बजट फ़ोन यानी 14 या 15 हज़ार के फ़ोन से बेहतर होती है। एक प्रीमियम फोन आपको Amoled Display देता है जबकि एक बजट फोन में आपको IPS Display मिलती है तो इसमें कोई शक नहीं की मूवी एक्सपीरियंस आपको एक प्रीमियम फोन में ज्यादा अच्छा मिलेगा।

लेकिन मैं इस प्वाइंट को इग्नोर करना चाहूंगा। क्योंकि अगर आप एक बजट फोन चला रहे हैं और अचानक किसी प्रीमियम फोन पर वीडियो देखते हैं तो आपको कुछ खास अंतर पता चलेगा। लेकिन फिर कुछ दिन बाद आदत हो जाती है और वह डिस्प्ले भी आपको नॉर्मल ही दिखने लगता है।

यह कुछ इस तरह से है कि आपने अपने छोटे टीवी की जगह बड़ा टीवी लगा लिया, और शुरुआत में आपको काफी बड़ा अंतर देख मजा आने लगा। पर जैसे ही 15 से 20 दिन गुजरते हैं, आपको अंतर भी भूल जाते हैं और वही नई स्क्रीन अब नई सी भी लगती बंद हो जाती है। तो ये Display Effect आपके दिमाग पर केवल कुछ दिन हो प्रभाव डालता है।

95% लोग फोन को सिर्फ और सिर्फ मूवी देखने के लिए नहीं खरीदते हैं, बाकी काम भी करने होते है। जिन्हे बिल्कुल ही Movie या Show देखने का शौक़ होता है वो टीवी ले लेते है। और आपको शौक़ है तो आप ले भी सकते है। लेकिन आपको इंस्टाग्राम या शॉर्ट्स चलाना है, या फिर केवल आधे–एक घंटे देखना है, वो भी 360p में, क्योंकि नेट ही अच्छा नहीं चलता। तो ऐसे में वैसे भी आपके इस अच्छे डिस्प्ले का कोई काम वैसे भी नही आने वाला। तो ऐसे में क्यों 80 से 90 हज़ार रूपए ज्यादा देना।

 

2. Processor

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किसी प्रीमियम या लुक्यूरियस फ़ोन का प्रोसेसर बहुत ज्यादा अच्छा होता है और दरअसल किसी बजट फोन से कही ज्यादा बेहतर परफॉर्म करते हैं। लेकिन उतनी High Performance का इस्तेमाल ही नहीं  होता।

लेकिन अगर आप एडिटिंग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं तो वह हाई परफार्मेंस कुछ आपके काम आ सकती है। लेकिन जो लोग एडिटिंग या फिल्म मेकिंग करते हैं, उनके पास लैपटॉप या कंप्यूटर होता है। लैपटॉप ज्यादा बेहतर काम करता है। तो अगर आप 80 से 90 हज़ार रुपए देके एक फोन ले रहे हो वो भी केवल एडिटिंग के लिए, बेहतर होगा वह पैसा आप एक अच्छे लैपटॉप पर लगाएं।

बाकी इतनी अच्छी परफॉर्मेंस के साथ हम एक प्रीमियम फोन में गेमिंग कर सकते हैं लेकिन फिर वही बात गेमिंग हम बजट फोन में भी कर सकते हैं। और अगर आपको वही गेमिंग उस महंगे प्रीमियम फोन में करनी है तो 80 से 90 हज़ार रूपए ज्यादा ऐसे फोन पे खर्च करने का कोई औचित्य नहीं होता।

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3. Camera

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एक बजट फोन और प्रीमियम फोन में कैमरे का बहुत बड़ा फर्क होता है। बजट फोन में फोटोस इतनी खास नहीं आती है जबकि वहीं दूसरी तरफ प्रीमियम फोन में photo की clarity, module, megapixel सच में काम करते है, सच में शाइन करते है और सच में अच्छी फ़ोटो देते हैं, जो की एक बड़ा अंतर है।

तो यदि आपके कमरे में सिर्फ क्लेरिटी चाहिए, की भईया हमें तो सिर्फ़ फोटो से मतलब है और क्लियर से क्लियर फोटो आना चाहिए, तो प्रीमियम फोन लेना सही बात है। लेकिन याद रहें जब आप फोन से फोटो खींचते है, तो आपकी शक्ल नहीं बदलने वाली। हां फोटो ज़रूर क्लियर आएगी। लेकिन अगर आपकी शक्ल ही राखी सावंत जैसी है तो आप टॉम क्रूस तो लगेंगे नहीं।

और अगर आपको सिर्फ और सिर्फ फोटो ही खींचते हैं तो आपको प्रोफेशनल कैमरा लेना चाहिए। फिर फोन पर 90 हजार देने का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि प्रीमियम फोन के कैमरे की क्वालिटी तब भी एक प्रोफेशनल फोन के कैमरे से कम ही होगी।

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4. Premium Body

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फ्लैगशिप फोन की बॉडी बहुत ही प्रीमियम और बहुत ही मज़बूत होती है।जबकि बजट फोन में सस्ती प्लास्टिक या ग्लास बॉडी होती है जो की प्रिमियम फोन के मुकाबले इतनी मज़बूत नहीं होती। पर याद रहे अगर आपका फोन डिस्प्ले की तरफ से गिरा तो डिस्पले बिना premium phone या budget phone का भेदभाव करें, टूटेगी ही टूटेगी।

तो यहाँ  पर प्रीमियम फोन के जितने भी एक्स्ट्रा फीचर थे, वो भी केवल डेडीकेटेड चीजों के लिए। अगर आप डेडीकेटेड मूवी देखते हैं, डेडीकेटेड एडिटिंग करते हैं या डेडीकेटेड फिल्म मेकिंग करते हैं। बहुत सारे फीचर्स तो ऐसे है जैसे सैमसंग डेक्स (Samsung Dex) या स्मार्ट पेन (Samsung Pen) जो की असल जिंदगी में ज्यादा काम नही आता। iPhone का सेटरलाइट फीचर (Satellite Feature) जो की इंडिया में ना होने के कारण काम भी नहीं आता।

तो आखिर में जितने भी हैवी फीचर दिए जाते हैं वह असल ज़िंदगी में ज्यादा काम के नही। ये सारे प्रीमियम फोन के फीचर जो फोन पे है पर काम बहुत ना के बराबर होते है। तो इस के लिए 90 हजार ज्यादा देना बेकार होगा।

तो फिर लोग क्यों इतना पैसा खर्च करते है, इसका साधारण जवाब है, Shadow Rich यानी Fake Rich बन ना। 2450 BC प्राचीन मिस्र के नूबिया में जब पहली बार गोल्ड पाया गया था, तो उसकी चमक देख लोग हैरान हो जाए। गोल्ड तब और ज्यादा दुर्लभ था और महंगा था, तो राजा महाराजा ने उसे गले पर, हाथों पर, सर के उप्पर रख गहने की तरह पहन ना शुरू कर दिया। पर क्या असल ज़िंदगी में गोल्ड का कोई काम का है? जवाब है नहीं। ऐसा नहीं की आप इसे खा अमर हो जायेंगे। ये सिर्फ एक दिखावा है जो दिखता है की आप कितने अमीर और सफल हो।

इसी तरह ये फोन भी बेचे जाते है। जिसे मॉडर्न दुनिया की गहना कह सकते है। और जब आप 1.5 लाख का फोन अपनी जेब से निकलते है तो भले ही सामने वाला ये सोचे या न सोचे की आप Rich है, आपको ज़रूर लगेगा लोग आपको Rich समझ रहे है। पर कमाल की बात तो तब है जब आप गरीब हैं, तो फिर अमीर दिख कर क्या करेंगे। और अमीर भी हैं, तो भी अमीर दिख कर क्या करेंगे।

तो यह सब साइकोलॉजी है। और असल में सिर्फ 5% लोग ही असल में इन प्रीमियर फोन के फीचर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। और अगर आप डेडीकेटेड गेमर है तो एक गेमिंग लैपटॉप लीजिए, डेडीकेटेड फोटोग्राफर है तो आपको प्रोफेशनल कैमरा लेना चाहिए। और डेडीकेटेड मूवीस देखना चाहते हैं लेकिन टीवी नहीं चाहते तो भी ठीक है, वरना टीवी लेना चाहिए।

हमें एक फोन पर साधारण काम करने होते है। नॉर्मल मैसेज, कॉल और व्हाट्सएप जैसी चीजें। तो ऐसे में सिर्फ महंगा फोन लेने का मतलब सिर्फ शोबाजी है।


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