Controlling Devices with Thought: जल्द ही आप कर पाएंगे अपने दिमाग से मोबाइल और कंप्यूटर को कंट्रोल 

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Controlling Devices with Thought: जल्द ही आप कर पाएंगे अपने दिमाग से मोबाइल और कंप्यूटर को कंट्रोल 

मूवी में अक्सर हमने देखा है लोगों को सिर्फ अपनी सोच से फोन या कंप्यूटर चलाते। लेकिन भले ही फ्लाइंग कार्स आनी शुरू नहीं हुई, पर हम जल्द ही अब दिमाग से मैसेज सेंड कर पायेंगे, इन्टरनेट चला पाएंगे, और बिना उंगली भी उठाए आपके पसंदीदा प्लेलिस्ट से गाने तक चला पाएंगे। अब आपको स्क्रीन पर टच करने, कीबोर्ड से टाइप करने, या फिर बोल कर काम करने की भी जरूरत नहीं होगी। यह सब करके के लिए अब बस सोचना होगा।

ऐसा हो पाएगा, हाल ही में एडवांस की गई brain-computer interfaces (BCIs) से।

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क्या है Brain-Computer Interfaces (BCI)?

BCI कम्युनिकेशन का वह रास्ता है, जो इंसानी दिमाग को किसी भी डिवाइस से जोड़ सकता है। रिसर्च काफी सालों से इस टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रहे है, लेकिन अब जा कर उन्हे आखिरकार सफलता प्राप्त हो चुकी है।

तो आइए जानते है यह कैसे काम करता है?

1. दिमागी सिग्नल्स: हमारा दिमाग में न्यूरॉन्स आपस में कम्युनिकेट करते है, तो इलेक्ट्रिक सिग्नल लागतार जनरेट होते है। BCI इन्ही सिग्नल्स को दिमाग पर इंप्लांट किए गए इलेक्ट्रोड्स की मदद से प्राप्त किया जाता है।

2. सोच को डिकोड करना: इसका एल्गोरिथम दिमाग के सिग्नल की छानबीन करता है, जिस से अलग अलग तरह के सोच और इरादों में मौजूद एक तरह के पैटर्न को डिकोड करता है। जैसे आपके हाथ को इधर उधर करने की सोच एक अलग तरह का ही न्यूरल पैटर्न बनाता है।

3. डिवाइस को कंट्रोल कर पाना: जब एक बार इन पैटर्न को डिकोड कर लिया जाता है, फिर इनका इस्तेमाल किसी एक्सटर्नल डिवाइस को कंट्रोल करने में किया जा सकता है। ऐसे में आप अपने फोन की एप्स को सिर्फ सोचने से ही स्क्रॉल कर पायेंगे, और केवल सोच कर ही ईमेल टाइप कर पायेंगे।

Elon Musk Neuralink chip got the FDA's approval; now the brain will be controlled with a chip
 

किसके लिए और किस क्षेत्र के लिए है काम का?

1. Accessibility

शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए BCI में अपार संभावनाएं लाता है। जो लोग मामूली ढंग से पैरालाइज या कोई अंग ना होने के कारण इन चीजों का इस्तेमाल नही कर सकते, वो लोग भी अब ऐसे में किसी भी डिवाइस का इस्तेमाल कर पाएंगे।

उदाहरण के लिए:

  • असमर्थ लोगों के लिए: लॉक-इन सिंड्रोम वाले व्यक्ति (जहां वे सचेत हैं लेकिन चलने में असमर्थ हैं) इसका उपयोग करके खुद को व्यक्त कर सकते हैं।
  • नियंत्रण पाने के लिए: विकलांग व्यक्ति अपने विचारों से रोबोटिक अंगों में हेरफेर कर सकते हैं।

2. गेमिंग और एंटरटेनमेंट

गेमिंग को भी यह बिल्कुल बदल सकता है।

  • Mind-Controlled Games: इसके जरिए आप गेम्स में निशाना लगाना और गोली चलाना सब अपने दिमाग से ही कर पाएंगे।
  • Virtual Reality: यह वर्चुअल दुनिया में काम करने की क्षमता की काया पलट देगा।

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BCI से आने वाले चैलेंज और दिक्कतें

यह ज़रूर काफी सारे बेहतरीन काम कर सकता है, पर साथ ही काफी सारी चुनौतियां भी ला सकता है।

1. Accuracy: दिमाग के सिग्नल को सही से पढ़ पाना एक बड़ी जटिल प्रक्रिया है। इसमें गलत सिग्नल पकड़ कर, यह कही अनचाही चीजें कर सकता है।

2. Privacy: चूंकि इसमें दिमाग का डाटा वायरलेस ट्रांसफर होता है, तो प्राइवेसी सबसे बड़े जोखिम में होती है।

3. Ethics: BCI प्राइवेसी, अनुमति, और पहचान में बदलाव कर सकता है।

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तो हम यह कह सकते है, मन से नियंत्रित होने वाले उपकरणों का युग शुरू हो रहा है। जैसे-जैसे टेक्नोलोजी आगे बढ़ रही है, यह कई लोगों के लिए अच्छा काम कर रही है, ख़ासतौर पर शारीरिक रूप से असहाय लोगों के लिए। लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने के कारण असल में इसकी ज़रुरत जिन्हें है, उन तक यह शायद न पहुंच पाए। उसके लिए हमें मिल कर प्रयास करने होंगे और ऐसे लोगों के लिए मदद करनी होगी।

फिलहाल यह टेक्नोलोजी अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन समय के साथ यह और डेवलप होगी, और सस्ती भी। तब जा कर शायद आपको मेट्रो में बगल में बैठा व्यक्ति भी दिमाग से फोन चलाता दिख जायेगा। लेकिन

यह भविष्य अभी दूर है, पर है जरूर। 🧠💻🌟


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