Cyber Troops and Recommended Media: आपके फीड पर आने वाली पोस्ट एक साज़िश है

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यदि आपको लगता है, कि आपने अपने देश की सरकार को खुद चुना है, यह आपका फैसला है, तो ऐसा नहीं है। अगर आपको लगता है iPhone 15 हमने खुद अपनी मर्ज़ी से खरीदा है, तो ऐसा नहीं है। अगर आपको लगता लग रहा है, एप का सब्सक्रिपश्न मै अपनी मर्ज़ी से ले रहा हूँ, अपनी समझ से, तो भी ऐसा नहीं है।

आपके फैसलों को पूरी तरह से मेनूप्लेट और शेप कर दिया गया है, Recommended Media द्वारा। सोशल मीडिया अब Recommended Media बन चुका है जहाँ पर पोस्ट या कंटेंट दिखा-दिखा कर आपके फैसलो को पूरी तरह से बदला जाता है।

93 देश ऐसे हैं, जहाँ पर रिकमेंडेशंस मीडिया का इस्तेमाल, सारी डिसइनफार्मेशन देके लोगों के फैसला को बदलने के लिए किया जाता है। बल्कि 67 देश तो ऐसे हैं, जहाँ पर कंप्यूटेशनल प्रोपेगेंडा को इस्तेमाल, लोगों के फैसला को शेप करने के लिए किया जाता है।

फेसबुक, इन्स्ताग्राम, ट्विटर, यूट्यूब यहाँ पर कुछ कंटेंट ऐसे दिखाए जाते है, जिन्हें आप कभी चाहते ही नहीं थे, आपने उन लोगों को कभी follow भी नहीं किया, लेकिन फिर भी आपके सामने एक ऐसा कंटेंट आता है। क्यों? कहाँ से? तो जवाब है, वह आया है सरकार की तरफ से, वह सरकार का प्रोपेगेंडा है। अब आप चाहो या ना चाहो वह आपके सामने आएगा ही। आमतौर पर हर देश साइबर ट्रूप्स का इस्तेमाल करता है, जहाँ पर वह कंप्प्रोयूटेश्न्ल पेगेंडा को इस्तेमाल किया जाता है।

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आपका AI मॉडल

AI model of human

2018 में, डोनल्ड ट्रंप के प्रेसिडेंशियल में फेसबुक ने 50 मिलियन लोगों का डाटा हार्वेस्ट करने के लिए बेच दिया, जिसमें लोगों की पसंद या नापसंद का डाटा था। आपके phone में जितनी भी एप्लीकेशन होती है, वही एप्लीकेशन आपका डाटा बेच रही है, आप जो भी स्क्रोल, लाइक, डिसलाइक या कॉल पर बात करते हो, हर तरह का डाटा जमा कर, आपका एक AI मॉडल तैयार कर लिया जाता है।

जो इन कंपनियों में पहले काम किया करते थे, उन्होंने भी रिविल किया है, कि हम कस्टमर के डाटा लेते हैं और उनका एक मॉडल बनाते हैं। इसमें यह भी डाटा होता है की आप सरकार को पसंद करते हैं या नहीं करते हैं, किसको चुनने वाले हैं या किसको नहीं चुनने वाले है। सरकार के पक्ष में आई किसी पोस्ट को अगर आप लाइक करते है, तो ज़ाहिर है पक्ष में है, डिसलाइक करते है, तो विपक्ष में।

आपका यही मॉडल फिर इन गवर्नमेंट बॉडीज या बड़े-बड़े प्रोडक्ट बेचने वालो को बेच दिया जाता है। जिसके बाद, उनका प्रोडक्ट बेचने में या सरकार को चुनने के लिए आपको उसी तरह का कंटेंट दिखाया जाता है। आपको कैटेगराइज कर के उसी के हिसाब से रिकमेंडेटरी पोस्ट या कंटेंट आपकी फीड में डाले जाते हैं।

आमतौर पर, सोशल मीडिया में क्या होना चाहिए, हम 10 से 20 लोग, मुझे कुछ पसंद आया तो मैंने शेयर कर दिया, अब जो मुझे फॉलो कर रहा है, उसकी फीड में वो पोस्ट दिखनी चाहिए, या मैं कुछ देख रहा रहा हूं तो उस से सम्बंधित कंटेंट ही मेरे सामने आना चाहिए ना, लेकिन असल में ऐसा नहीं हो रहा है।

यहाँ पर कुछ इन टर्म्स का इस्तेमाल होते है:

Confirmation Bias: आपके माइंड को एक रूप देने के लिए, कंफर्मेशन बायस टर्म को इस्तेमाल किया जाता है। जिसका मतलब आपको उस बात पर यकीन करवा दिया जाता है, जिसके लिए आप पहले से कंफ्यूज थे।

Eco Chamber: चारों तरफ से दिखाकर एक एको चेंबर तैयार किया जाता है, एको चेंबर का मतलब, चारों तरफ से कंटेंट, पोस्ट या बातें किसी पॉपुलर सेलिब्रिटी के ज़रिये कंटेंट की बरसात की जाती है।

Bandwagon Effect: बैंड वेगन इफेक्ट में आपको यकीन करवा दिया जाता है, की जो लोग कर रहे हैं, वह सही है, इतने लोग कह रहे हैं तो गलत थोड़ी कह रहे होंगे। ऐसे में आप फैक्ट भी चेक नहीं करते, जिससे आपका फैसला एक शेप ले लेता है। और आपको लगने लगता है, कि यही सही फैसला है।

 

साइबर ट्रूप्स (Cyber Troops)

Cyber Troops

साइबर ट्रूप्स के पास बहुत सारे फेक अकाउंट हैं। एक रिपोर्ट के 96 मिलियन अकाउंट इन्स्ताग्राम पर फेक है, 238 मिलियन अकाउंट ट्विटर पर फेक है, सारे ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फेक अकाउंट मौजूद है। इनमे अधिकतर साइबर ट्रूप्स या गवर्नमेंट बॉडी इस्तेमाल करते है। कोई भी साइबर ट्रूप्स कुछ इस तरह के काम करती है।

1. फेक अकाउंट से कमेंट्स

बहुत सारे फेक अकाउंट होते है, जहाँ एक ही जैसे ट्वीट्स, कंटेंट, या सेंटेंसेस इस्तेमाल किए जाते हैं। और पता भी नहीं चलता, की यह फेक अकाउंट है। इन अकाउंट्स में 87% ह्यूमन है, 81% के करीब साइ ब्रॉक्स और 11% के करीब इसमें बोट्स हैं, और 7% हैक्ड अकाउंट भी हैं, जिनका इस्तेमाल यह साइबर ट्रूप्स करते है। इन फेक अकाउंट्स द्वारा, सबके हिसाब से उनके ट्वीट या पोस्ट के नीचे कमेंट किए जाते हैं। यदि वह पोस्ट सरकार के पक्ष में है या प्रोडक्ट के पक्ष में है, तो पॉजिटिव कमेंट किए जाते हैं। और कभी कभी नेगेटिव पोस्ट या कमेंट्स पर बुरे कमेंट्स या उन्हें ट्रोल भी किया जाता है।

2. सेलेब्रिटी द्वारा पोस्ट

किसी पॉपुलर इन्फ्लुएंस या सेलिब्रिटी द्वारा एक प्रॉपर पोस्ट करवाया जाता  है, कई बार तो मेरे पास भी कई ऑफर आए हैं, जहाँ पर एक पर्टिकुलर ट्वीट कॉपी पेस्ट करने के लिए दे दिया जाता है, या रिट्वीट करने के लिए दिया जाता है। इनके पास इसका भी डाटा है की आपको कौन से सेलिब्रिटी पसंद है, तो उन्ही क इस्तेमाल यह ये पोस्ट करने के लिए करवाते है। और उसके नीचे फिर वही फेक अकाउंट से पॉजिटिव कमेंट करा देंगे, जिस से  आप बिल्कुल मान जाते हो की यह सब सही ही कह रहे है।

3. लोगों द्वारा पेड कमेंट

इस कमेंट्स के खेल में मामूली लोग भी होते हैं, जो की हाँ असली अकाउंट होते हैं, जिसके लिए उनको पैसे दिए जाते है। जिसे क्लिक फार्मिंग कहा जाता है। उन्हें पैसे दे कर एक प्रॉपर ट्वीट या रिट्वीट किए जाते हैं। ऐसे ही ट्वीट यूएस में कोविड के टाइम पर आया था, कि कोविड पेशेंट अब जीरो हो चुके है, जो कि असल में जीरो नहीं हुए थे। यह यकीन दिलाने के लिए की सरकार कितना बढ़िया काम कर रही है, इन साइबर ट्रूप्स द्वारा उनके रीट्वीट करवाएं गए।

4. नेगेटिव कमेंट्स और ट्रोलिंग

कई बार नेगेटिव कंटेंट भी आता है, लोग हर बार ज़रूरी नहीं उस सरकार को या प्रोडक्ट को पसंद करें, लेकिन वैसे पोस्ट या कमेंट ज्यादा नजर नहीं आएंगे। या तो उन्हें आपकी फीड पर रिकमेंड या पुश नहीं किया जाता, या फिर डिलीट करवा दिया जाता है। पास्ट में, सरकार ने बिना किसी वजह के ट्विटर पर बहुत सारे पोस्ट और अकाउंट डिलीट करवा दिए। उन लोगों के हिसाब से उन्होंने कुछ किया भी नहीं था। आपके रिकमेंडेशन में केवल पॉजिटिव वीडियो देखने को मिलेंगी पॉजिटिव कंटेंट देखने को मिलेगा।

जब कुछ पॉपुलर लोगों की पोस्ट यह डिलीट नहीं करवा सकते तो उसे या तो रिकमेंडेशन से बाहर करवा देते हैं, या उनके पोस्ट के नीचे साइबर ट्रूप के हाथों से नेगेटिव कमेंट करवा दिए जाते हैं, या उनके उनको हैरेस करवा दिया जाता है। कई रिपोर्टर्स तो गायब हो गए, कई यूट्यूब चैनल डिलीट हो गए।

5. नेगेटिव पोस्ट

ख़ासतौर पर इलेक्शन के आसपास, विपक्ष की सरकार के विरोध में कंटेंट मिलेगा, रिलीजियस चीजों के बारे में, दंगे, या प्रॉब्लमैटिक वीडियो बहुत ज्यादा देखने को मिलेंगी। क्योंकि यह आपके फैसलों को पूरी तरह बदलना चाहते है।

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Social Media feed

ऐसा ही कुछ 26 जून 1975 की इंदिरा गांधी के इमरजेंसी के दौरान हुआ था। कई सारे प्रेस की फ्रीडम चीन ली गयी थी, कई सारे इंटरनेशनल और डोमेस्टिक न्यूज़पेपर को रोक दिया गया था। साथ में 40 से ज्यादा रिपोर्टर्स को नौकरी से हटा दिया गया था। इस तरह भी मीडिया को मैनिपुलेट किया गया था, ताकि देश में क्या हो रहा है किसी को पता ना चले।

मेरा एक पर्सनल एक्सपीरियंस भी है, दिल्ली में जब एक बार प्रदुषण कम करने के लिए ओड ईवन डीवन शुरू हुआ था, तो तुक्के की बात यह है कि जिस दिन यह शुरू हुआ, उसी दिन सुबह-सुबह 8-9 बजे करीब मैं मेट्रो में गया था। जहाँ लगे एक पोस्टर में लिखा था, दिल्ली में प्रदुषण 20% कम हो गया है, जबकि यह स्कीम आज ही से शुरू हुआ था, तो आज ही कैसे प्रदुषण कम हो जाएगा।

मेरे पास इसके लिए कोई प्रूफ नहीं है। उनके एडवर्टाइजमेंट को यदि कोई दो-तीन देख लेगा, तो लोगों को भी लगने लगेगा की, हाँ सचमुच कम ही हो गया होगा, तभी यह पोस्ट आई है। जबकि असल में वह एडवर्टाइजमेंट उसी दिन लग गए थे, बल्कि मुझे लगता है पिछली रात लग गए होंगे।

इस तरह आखिर में चारों तरफ प्रोपेगेंडा का शोर मचने के बाद, आपकी पसंद नापसंद को समझने के बाद आपके दिमाग में यह बैठा दिया जाता है, कि सरकार बहुत बढ़िया है, और इसी को वोट दो। यह सारा प्रोपेगेंडा सरकार ने खुद को वोट दिलाने के लिए ही किया और आप सरकार को वोट देते हो। यह सिर्फ आप ही नहीं, बल्कि 93% देश यह सब करते हैं। सब देशों में साइबर ट्रूप है, सब देशों में Recommended Media चल रहा है।

        यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो, आपके सामने रिकमेंड में कोई भी ऐसी पोस्ट आए, जिसे आपने फॉलो तक नहीं किया, तो सबसे पहले उस पे यकीन ना करें, फैक्ट चेक करें, तब ही उस पर यकीन करें। iPhone 15 या महँगी चीज़ों को भी यह कह के बेच दिया जाता है, की आप गरीब दिखोगे, इस से क्लास बनेगी या आप नया प्रोडक्ट नहीं लेते तो आप ओल्ड स्कूल हो जाओगे। तो इस लिए खुद से फैक्ट चेक करो, अपना बजट बना कर रखो, या जिस बात पर भरोसा करना है, सिर्फ लोग कह रहे हैं इसलिए मत करों। सोशल मीडिया पर रिकमेंड होने वाली पोस्ट पर भरोसा ना करें अपने दिमाग से अपनी समझ से फैसला करें।


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