Dark Patterns in E-commerce: आखिरकार E-commerce के Dark Patterns पर कानून कसेगा नकेल

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Dark Patterns in E-commerce: आखिरकार E-commerce के Dark Patterns पर कानून कसेगा नकेल

डार्क पैटर्न e-commers की दुनिया की ऐसी भ्रामक तकनीक हैं, जो यूजर्स से ऐसे ऐसे काम करवा देती हैं, जो वह असल में ऑनलाइन करना ही नहीं चाहते थे। यह यूजर्स को अनवांटेड सब्सक्रिप्शन के लिए साइन–अप करवा सकती हैं, व्यक्तिगत जानकारी शेयर करवा सकती हैं, या ऐसे प्रोडक्ट्स खरीदवां सकती हैं, जिनकी असल में उसे ज़रूरत ही नहीं थी।

हम बात कर रहे है,

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😓 बुरा महसूस करवाना: इसमें किसी प्रोडक्ट को न चुनने के लिए, यूज़र को छोटा महसूस कराया जाता है। जैसे की मामूली से “क्लोज” बटन की जगह “नहीं शुक्रिया, मैं पूरी कीमत देना चाहूंगा चाहूंगा” दिखाई देगा।

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🌝 दिखाना कुछ और देना कुछ: इसमें सर को दिखाया कुछ जाता है और दिया कुछ जाता है। जैसे हो सकता है वह “फ्री ट्रायल” पर क्लिक करें लेकिन उसका अनजाने में “पेय सब्सक्रिप्शन” ही एक्टिव हो जाए।

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💸 छुपाई हुई कीमत: इसमें असल में किसी चीज की कीमत कम दिखाई जाती है और किसी और चीज के नाम पर बिना अच्छे से बताएं उससे ज्यादा कीमत वसूल की जाती है। उदाहरण के लिए कोई फ्लाइट टिकट बुक करता है, लेकिन आखिर में पता चलता है उसे टैक्स या इंश्योरेंस के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।

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🤨 कैंसिलेशन मुश्किल बना देना: जब कोई वेबसाइट या ऐप किसी यूज़र को किसी चीज के लिए साइन अप करवाना तो बहुत आसान बना देती है, पर उसको कैंसिल या अनसब्सक्राइब करवाना उतना ही मुश्किल बना देती है। जैसे कोई मेंबरशिप ज्वाइन करें, लेकिन अब उसे कैंसिल करने के लिए अब उसे कस्टमर केयर में कॉल या मेल करनी पड़ रही है।

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🔏 प्राइवेसी के साथ खिलवाड़: इसमें अक्सर यूजर को उसकी पर्सनल जानकारी से कहीं ज्यादा ले लिया जाता है, जिसे देने के लिए उसकी कभी मंजूरी नहीं थी। जैसे हो सकता है कोई केवल अपनी ईमेल एड्रेस शेयर करना चाहता था, लेकिन अब उसके कॉन्टैक्ट्स लोकेशन या ब्राउजिंग हिस्ट्री भी उनके पास चली जाती है।

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कंज्यूमर्स को डार्क पैटर्न से बचाने के लिए, भारत की Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने हाल ही में ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के लिए गाइडलाइन जारी किए हैं। इन गाइडलाइन के अनुसार, ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को:

“Only 1 left”, ज़बरदस्ती कार्ट में अपने सब्सक्रिप्शन एड कर देना, 5 मिनट में यह डील खत्म हो जायेगी, जैसे कई डार्क पैटर्न के उप्पर अंकुश लगाएगी। यह असल में न केवल अनैतिक हैं, बल्कि कंज्यूमर्स की प्राइवेसी और राइट्स के लिए भी नुकसानदेह हैं।

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💡 अपने द्वारा दी जाने वाली प्रोडक्ट्स और के बारे में सभी संबंधित जानकारी जैसे की कीमत, क्वॉलिटी, विशेषताएँ, और नियम व शर्तों का खुलासा करें।

🔓 यूज़र को उनकी व्यक्तिगत जानकारी के कलेक्शन, इस्तेमाल और शेयरिंग पर सहमति देने या अस्वीकार करने के लिए स्पष्ट और आसान विकल्प दें।

🎭 यूज़र की पसंद या कामों को प्रभावित करने के लिए किसी भ्रामक या लाचारी वाली भाषा, ग्राफिक्स या इंटरफ़ेस का इस्तेमाल न करें।

✅ यूज़र की स्पष्ट सहमति के बिना उनके लिए किसी भी ऑप्शन या प्राथमिकता को पूर्व-चयन न करें।

🕳️ यूज़र के लिए लाभकारी या जरूरी किसी भी जानकारी या विकल्प को न छिपाएं, न अस्पष्ट करें या न देर करें।

🔚 ऐसी किसी भी तरीके का इस्तेमाल न करें जो यूज़र की ट्रांजैक्शन या सिलेक्शन से एक्जिट करने, कैंसल करने या मोडीफाई करने की क्षमता में दखल देती हो।

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CCPA गाइडलाईन का लक्ष्य साफ़ और ट्रांसपेरेंट ई-कॉमर्स के तरीको को बढ़ावा देना है, और कंज्यूमर्स को ऑनलाइन सही फैसले लेने के लिए सशक्त बनाना है। CCPA के पास नियमों का उल्लंघन करने वाले या कंज्यूमर्स को नुकसान पहुंचाने वाले, किसी भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के खिलाफ जांच करने, दंडित करने और कार्रवाई करने का अधिकार है।

CCPA गाइडलाईन डार्क पैटर्न को रेगूलेट करने और डेटा प्राइवेसी को बढ़ाने की एक कोशिश है। उदाहरण के लिए, अमेरिका के California Consumer Privacy Act (CCPA) और यूरोप के General Data Protection Regulation (GDPR) में भी डार्क पैटर्न को रोकने और दंडित करने के प्रावधान हैं।


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