Dark Reality of Bigg Boss: समाज के लिए हानिकारक ☠️

6 Min Read

Dark Reality of Bigg Boss: समाज के लिए हानिकारक ☠️ 

एक ऐसा शो लड़ाई, झगड़ा, चीखना, चिल्लाना, हंगामा, साज़िश, दूसरो को बेज़्जत करना, और क्या–क्या नहीं मिलता एक रियलिटी शो में। जी हाँ एक ऐसा रियलिटी शो को जिसमें सब कुछ स्क्रिप्टिड है। हम बात कर रहे है, इंडिया के सबसे पसंदीदा रियल्टी शो यानी बिग बॉस की।

इसकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा आप बस इस बात से लगा सकते है, की इसके 17 से भी ज्यादा सीज़न अब तक आ चुके हैं। सीज़न 16 में 127 मिलियन लोगों ने Colors चैनल पर यह शो देखा था, तो वही 600 मिलियन व्यूज इसके Voot App पर थे। बिग बॉस OTT से JioCinema app पर 10 करोड़ से भी ज्यादा नए यूजर जुड़े।

लेकिन यह रियलिटी शो जितना असली दिखता है, उतना ही नकली है। बिग बॉस के पुराने कंटेस्टेंट्स अपूर्व अग्निहोत्री सीज़न 7 से और अरुण सीज़न 17 का कहना है की बिग बॉस एक स्क्रिप्टेड शो है। जहाँ प्रोड्यूसर सारी चीजों को कंट्रोल करते हैं, जानबूझकर झगड़े वाले सिचुएशन पैदा किए जाते हैं और टीआरपी बढ़ाने के लिए ड्रामा क्रिएट किया जाता है।

कंटेस्टेंट्स पर असर

1. मानसिक स्वास्थ्य का हाल बेहाल

Himanshi khurana

कंटेस्टेंट्स को हर समय इस बात का आभास रहता है कि उन्हें चौबीसों घंटे मॉनिटर किया जा रहा है, जहाँ कहीं ना कहीं उनके मन में हर वक्त परफॉर्म करने का प्रेशर होता है। Bigg Boss OTT में अब आप चौबीसों घंटे लगातार बिग बॉस के घर को देख सकते हैं, जिससे यह है और ज्यादा बत्तर हो गया है।

कंटेस्टेंट्स खुद जानबूझकर ऐसी सिनेरियो क्रिएट करते हैं जिससे वह ज्यादा से ज्यादा समय कैमरा के सामने रहे और स्क्रीन टाइम ले सके। अब भले ही उन्हें उसके लिए कुछ बुरा ही क्यों न करना पड़े। उन्हें पता है वह ड्रामा क्रिएट करेंगे तो उनके इस शो में रहने के चांसेस भी उतने ही बढ़ेंगे।

लास्ट सीजन की कंटेस्टेंट अंकिता लोखंडे ने कहा है कि उन्हें बिग बॉस के एपिसोड देखने पर एंजायटी हो गई है, यहाँ तक की उन्होंने बिग बॉस रीयूनियन पार्टी में आने से भी मना कर दिया।

इसी तरह सीजन 13 की कंटेस्टेंट हिमांशी खुराना, severe depression में चली गयीं, जिस से वो अभी तक झुंझ रहीं हैं।

2. बेइज्जती में बदलती इज्ज़त

avinash sachdev trolling bigg boss

कंटेस्टेंट्स से शो के लिए कुछ ऐसे एग्रीमेंट्स पर साइन करवाया जाता है जिससे उनकी पर्सनल लाइफ को इस्तेमाल किया जा सके। इस शो में उनकी पर्सनल लाइफ, ट्रॉमा, रिलेशनशिप, डिवोर्स, ब्रेकअप, आदि वगैरह को सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए, बहुत ज्यादा हाईलाइट किया जाता है।

बिग बॉस किसी को फेम दिला सकता है पर कभी-कभी इसका असर उल्टा भी हो जाता है। कभी-कभी उनकी बोली गई बातें या उनके पर्सनल लाइफ के कुछ किस्से इनकी पब्लिक रेपुटेशन की धज्जियां बुरे और लंबे समय के लिए उड़ा सकती हैं।

इसके अलावा किसी दूसरे कंटेंस्टेंट से हो रही स्क्रिप्टिड लड़ाई में अक्सर उसे दूसरे कंटेस्टेंट के फैंस चीजों को सीरियसली लेकर उसे पहले वाले कंटेस्टेंट को हैरेस या बुली तक करने लगते हैं। ऐसा ही हुआ था अविनाश सचदेव के साथ जहाँ एल्विश यादव के फैंस ने उनको, उनके परिवार वालों, दोस्तों और टीम तक को धमकी दे डाली।

दर्शकों पर हानिकारक प्रभाव

1. Anxiety और Negative Vibes 😰

साइकियाट्रिस्ट डॉ. अनिता गौतम का कहना है, की रिएलिटी टीवी शो जैसे “Bigg Boss” का हमारी मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता हैं। उन्होंने यह भी बोला, ऐसे शो व्यूअर्स के स्ट्रेस, एंसाइटी और बल्कि डिप्रेशन को ट्रिगर करते है। जिसकी वजह है शो में अक्सर एग्रेसिव व्यवहार और बुली करते दिखाया जाना, जो की इंसान के नेगेटिव इमोशंस पर असर डालती है।

e-SIM in India Why are telecoms at battle with smartphone manufacturers?

2. टॉक्सिक व्यवहार को नॉर्मल करना 🤬 

डॉ. अनिता गौतम बताती है कैसे “बिग बॉस” जैसे रियलिटी टीवी शो अक्सर प्रतियोगियों के बीच toxic व्यवहार को दर्शाते हैं। इन टीवी शो में नफरत, गुस्सा, मैनिपुलेशन और लड़ाई जैसे नेगेटिव इमोशंस का इस्तेमाल, बहुत सारा ड्रामा क्रिएट कर के अपनी रेटिंग बढ़ाने के लिए किया जाता है।

ऐसे शो दिन रात देखने से आम जनता को भी लगने लगता है की ऐसा व्यवहार सामान्य है, और वो भी ऐसा ही कर सकते है।

3. बेज्ज़त करना 😓

“बिग बॉस” जैसे रियलिटी शो जैसे दूसरों को ह्यूमिलिएट या अनकंफर्टेबल होते देख मनोरंजन महसूस करते है। व्यूअर्स को कांटेस्ट को चैलेंज या पंगे में पड़तेदेख खुशी मिलती है, फिर भले ही सामने वाला शर्मिंदा या अनकंफर्टेबल ही क्यों न महसूस कर रहा हो।

जो की इंसानों की एक डार्क साइड को और उजागर करता है, जो की मामूली बात बिलकुल भी नहीं है, और किसी भी दिमागी स्वस्थ के लिए ठीक नहीं।

Bigg Boss जैसे शो, हमारे लिए लंबे समय तक देखना खुद हमारे दिमागी स्वस्थ के लिए ठीक नहीं है। ऐसे शो हमें एंटरटेन तो करती है, पर साथ में कई ऐसी नकारात्मक चीजे दिमाग में डाल देती है, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए सही नही है। कोशिश करें आप इस तरह के शो से दूर रहे, और क्वालिटी कंटेंट देखे।


लोग गुस्से में फोन क्यों पटकते है? वजह जान कर चौंक जाएंगे

लोग गुस्से में फोन क्यों पटकते है? वजह जान कर चौंक जाएंगे

मोमेंट्स को कैद करने का मनोविज्ञान: हम आखिर क्यों लेते है हर चीज़ का फोटो?

मोमेंट्स को कैद करने का मनोविज्ञान: हम आखिर क्यों लेते है हर चीज़ का फोटो?

 

Share this Article
Leave a comment