Gen Z Mental Health: कैसे सोशल मीडिया जेन Z की ज़िन्दगी बर्बाद कर रहा है?

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Gen Z Mental Health: How Social Media is Ruining the Lives of Gen Z

1996 से ले कर 2010 के बीच पैदा हुई पीढ़ी यानी Gen Z, देश का भविष्य हैं। लेकिन भविष्य की यह पीढ़ी किसी भी और पीढ़ी की तुलना में सबसे खराब परिस्थितियों का भी सामना कर रही हैं। यह मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक, हर संभव तरीके से सोशल मीडिया से प्रभावित होते हैं, और इसी के साथ बड़े हुए हैं। इस आर्टिकल में, मैं बताऊंगा कि सोशल मीडिया Gen Z को कैसे नुकसान पहुंचा रहा है। वो खुद या हम उनकी मदद के लिए आखिर क्या कर सकते हैं?

सोशल मीडिया Gen Z को कैसे प्रभावित कर रहा है?

(How Social Media is Affecting Gen Z)

Gen Z सोशल मीडिया के साथ ही बड़ी होने वाली पहली पीढ़ी है। यह पैदा होने के बाद से इसमें लगातार डूबे हुए हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 54% Gen Z सोशल मीडिया पर 4 घंटे से ज्यादा वक्त बिताते हैं, जबकि 38% से भी ज्यादा दिन में 8 से 9 घंटे तक बिता रहे हैं। सोशल मीडिया के इस तरह से ज्यादा उपयोग, उनके स्वास्थ्य पर भी हानिकारक प्रभाव डालता है।

यहां कुछ तरीके दिए गए हैं, जिनसे सोशल मीडिया Gen Z के ज़िन्दगी को बर्बाद कर रहा है:

A boy using phone with an angry face and throwing a book aside

  1. ज़्यादा समय ध्यान न दे पाना 😴

Gen Z की औसत ध्यान अवधि केवल 8 सेकंड है, जबकि अन्य पीढ़ियों के लिए यह 12 सेकंड है। इसका मतलब यह है कि इन्हें ऐसी किसी भी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है जो तुरंत संतुष्टि प्रदान नहीं करती है। यह आसानी से ऊब जाते हैं और तुरंत अगली चीज़ पर चले जाते हैं।

यह किताबें नहीं पढ़ते, लंबे वीडियो नहीं देखते, या पॉडकास्ट नहीं सुनते। यह छोटी और अच्छी दिखने वाले ही कंटेंट पसंद करते हैं, जैसे रील, मीम्स और टिकटॉक वीडियो।

इससे इनके अकेडमिक परफोर्मेंस पर असर पड़ता है, क्योंकि इन्हें सीखने और जानकारी बनाए रखने में कठिनाई होती है। यह उनकी क्रिएटिविटी को भी प्रभावित करता है, क्योंकि यह नए विचारों या दृष्टिकोणों की खोज नहीं करते हैं।

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  1. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं 😞

Gen Z की Mental Health ख़राब है, इन्हें एंज़ाईटी, स्ट्रेस और डिप्रेशन है। 42% Gen Z  में Mental Health प्रोब्लेम्स हैं, और 22% में आत्मघाती विचार हैं, 10% ने आत्महत्या का प्रयास किया है।

इसके कई कारण हैं, लेकिन उनमें से एक प्रमुख कारण सोशल मीडिया है। सोशल मीडिया Gen Z को लगातार दुसरो से तुलना, अवास्तविक अपेक्षा, साइबरबुलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न जसी चीज़ों का सामना करना पड़ता है। यह अपनी तुलना सेलिब्रिटी और इन्फ्लुंसर से करते हैं, जो अपने परफेक्ट मोमेंट्स की एडिटेड फोटो पोस्ट करते हैं।

ये खुद को छोटा, बदसूरत और दुखी महसूस करते हैं। इन्हें लाइक, कमेंट और फॉलोअर्स पाने के लिए भी दबाव का सामना करना पड़ता है। इन्हें पीछे छूट जाने, छोड़ दिए जाने या जज किए जाने का डर रहता है। यह अपना सेल्फ-वर्थ और पहचान खो देते हैं।

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  1. शारीरिक समस्याएं और आत्मसम्मान 😣

Gen Z की सुंदरता और अपने शरीर की छवि के बारे में बड़ी बिगड़ी हुई धारणा है। यह सोशल मीडिया से प्रभावित होते हैं, जहां यह सुंदरता और शरीर के आइडियलाईज़ड स्टैंडर्ड्स देखते हैं, जैसे सिक्स-पैक एब्स, बेदाग त्वचा और पतली कमर। यह सोचते हैं कि ये मापदंड हैं, और आकर्षक और सफल होने के लिए इन्हें वैसा ही दिखना होगा। यह अपनी शक्ल-सूरत से असंतुष्ट होते हैं।

58% महिलाएं और 43% पुरुष अपने शरीर को लेकर चिंतित हैं। यह अपने रूप को बदलने के लिए अनहैल्दी तरीकों का सहारा लेते हैं, जैसे हानिकारक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना, स्टेरॉयड लेना या प्लास्टिक सर्जरी करवाना।

इनमें ईटिंग डीसोर्डर और बॉडी डिस्मॉर्फिक डीसोर्डर जैसे डीसोर्डर विकसित हो जाते हैं, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। यह खुद को सामाजिक परिस्थितियों से अलग कर लेते हैं और ज्यादातर स्ट्रेस में रहते हैं।

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  1. ध्यान आकर्षित करना 🙋‍♂️

Gen Z ने दूसरों से खुद को पसंद करवाने की एक आदत विकसित कर ली है। यह फोटोज पोस्ट करना चाहते हैं और फिर लाइक चेक करते रहना चाहते हैं, अब चाहे लाइक आएं या न आएं। अगर इन्हें कम लाइक मिलते हैं, तो यह खुद को इग्नोर्ड महसूस करते हैं। यहां तक कि कही बाहर जाने के बाद भी ये लाइक्स ही चेक करते रहते हैं।

यह हर चीज़ की फोटोज पोस्ट करते हैं – खाना, नाचना, घूमना, शायद साँस लेना भी और फिर उसके बाद लाइक की उम्मीद करते हैं। जब लाइक नहीं मिलते, तो यह एनज़ाइटी और स्ट्रेस में आ जाते हैं, इन्हें ऐसा लगता है कि “लोग मुझे पसंद नहीं करते।” इसे FOMO (छूट छूट जाने का डर) कहा जाता है।

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  1. दिखावा करना और फेक होना 😏

Gen Z लगातार एक झूठ में रहते है, कुछ ऐसा होने का दिखावा करता है जो शायद वह है नहीं, खासकर फोटोज पोस्ट करते वक्त। यह अच्छी जगहों पर जाते हैं, लेकिन वास्तव में, यह वहां रहते नहीं। यह अच्छा खाते हैं, अच्छे कपड़े पहनते हैं, जो सब दिखावे के लिए किया जाता है।

91% Gen Z  ने स्वीकार किया है, कि यह सोशल मीडिया के कारण स्ट्रेसफुल हैं। एक फेक इन्सान मामूली ज़िन्दगी में हमेशा तनावग्रस्त ही रहेगा। क्योंकि यह हर बार सोशल मीडिया पर अपनी एक आदर्श छवि बनाए रखने की कोशिश करते हैं।

 

 

इन मामलो में है Gen Z अच्छे

Gen Z holding a banner to save the environment

(Gen Z is good in these matters)

हालाँकि, Gen Z अन्य पीढ़ियों की तुलना में हर चीज़ में बुरे नहीं है; कुछ पहलुओं में यह औरो से बहुत आगे हैं। उदाहरण के लिए, इनकी ताज़ा धारणा और इनोवेशन अनूठी है। छोटे व्यवसाय मालिकों का कहना है कि Gen Z के पास अलग-अलग प्रकार के विचार होते हैं, जो अब से पहली पीढ़ी के पास नहीं थे।

यह सबसे ज्यादा समस्या सुलझाने वाली पीढ़ी हैं; इन्हें एक समस्या दीजिए और यह उसका समाधान कर देंगे। पिछली पीढ़ियों के उलट, जो या तो उस परेशानी को स्वीकार कर लेते है, या उसके साथ एडजस्ट करना सीख लेते है, यह सोचकर कि ज़िन्दगी ऐसी ही है। लेकिन इन्हें एक  समस्या दीजिए और यह उस समस्या को सुलझाने में सबसे आगे रहते हैं।

तीसरा गुण ये अडेप्टिव है। उन्होंने महामारी और युद्ध तक देखे हैं, इसलिए यह बहुत जल्दी अडेप्ट कर लेते हैं और एडजस्ट हो जाते हैं।

यह टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट हैं, जिसमें अब से पहले की किसी भी पीढ़ी को पीछे छोड़ रहे हैं क्योंकि यह प्रौद्योगिकी के साथ बड़े हुए हैं।

और यह पहली पीढ़ी है, जो सामाजिक रूप से जागरूक है। पिछली पीढ़ियों के विपरीत, जहां केवल कुछ ही लोगों की ही राजनीतिक राय या पर्यावरण की चिंता थीं, पर यह सामाजिक मुद्दों, विशेष रूप से पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर तेजी से सक्रिय हो जाते हैं।

लेकिन ये सब तो अच्छा है, लेकिन इनके मानसिक स्वास्थ्य का बोझ इस से ज्यादा है। Gen Z को 15-16 साल की उम्र में ऐसी बीमारियाँ हो रही हैं जो किसी 80 साल के इन्सान को होती थीं, जैसे बीपी, शुगर, हार्ट अटैक, टेक्नेक्स, जिससे इनकी रीढ़ की हड्डी झुक जाती है। और कम उम्र में ही इनका शरीर ख़राब हो गया है। अगर किसी व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति ही ठीक नहीं है, तो किसी भी गुण का क्या फायदा?

 

Gen Z की मदद के लिए हम क्या कर सकते हैं?

A group of Gen Z doing Exercise

 

(What Can We Do to Help Gen Z?)

यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया Gen Z पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है और हमें उनकी मदद के लिए कुछ करने की जरूरत है। यहाँ कुछ सुझाव हैं:

  • 📲 सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करें: Gen Z को सोशल मीडिया पर अपना वक्त सीमित करना चाहिए, और इसका उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों, जैसे कुछ सीखने, दूसरों से जुड़ने और प्रेरणा देने के लिए करना चाहिए। इन्हें सोशल मीडिया को अपने ज़िन्दगी पर हावी नहीं होने देना चाहिए और इन्हें अपने लक्ष्यों और सपनों से भटकना चाहिए। इन्हें इस बात से सावधान रहना चाहिए कि यह ऑनलाइन क्या पोस्ट करते हैं, शेयर करते हैं और कंस्यूम करते हैं।
  • 🏀 ऑफ़लाइन गतिविधियों को प्रोत्साहित करें: Gen Z को ऑफ़लाइन गतिविधियों में ज्यादा इंगेज होना चाहिए, जैसे पढ़ना, लिखना, खेलना, व्यायाम करना, ध्यान लगाना और वोलंटियर करना। इन्हें असल लोगों के साथ भी मेलजोल बढ़ाना चाहिए और अपने परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताना चाहिए।
  • 🎭 विविधता और वैयक्तिकता को अपनाना: Gen Z को अपनी विविधता और वैयक्तिकता को अपनाना चाहिए, न कि दूसरों से अपनी तुलना करनी चाहिए। इन्हें एहसास होना चाहिए कि हर कोई स्पेशल और सुंदर है, और सुंदरता या शरीर का कोई एक स्टैण्डर्ड नहीं है। इन्हें अपनी ताकत और कमजोरियों की सराहना करनी चाहिए और खुद को बेहतर बनाने पर काम करना चाहिए। इस के ही साथ दूसरों का भी सम्मान और सराहना करनी चाहिए। इन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी को जज या बुली नहीं करना चाहिए।
  • 🧘 थोड़ा धीमा होना और ध्यान करना सीखें: Gen Z को चीजों के पीछे भागने और पीछा करने के बजाय धीमा करना और वर्तमान पलों का आनंद लेना सीखना चाहिए। इन्हें माइंडफुलनेस और ध्यान का अभ्यास करना चाहिए, जो इन्हें स्ट्रेस, एनज़ाइटी और डिप्रेशन को कम करने में मदद कर सकता है। अपने पास जितना है उसके लिए खुश होना सीखना चाहिए और चीजों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इन्हें यह एहसास होना चाहिए कि खुशी चीजों को प्राप्त करने के बारे में नहीं है, बल्कि इन्हें अनुभव करने के बारे में है।
  • 🧩 समझें कि आदर्श ज़िन्दगी एक भ्रम है: Gen Z को यह समझना चाहिए कि आदर्श ज़िन्दगी जैसी कोई चीज नहीं होती है, और हर किसी के अपने संघर्ष और चुनौतियाँ होती हैं। इन्हें सोशल मीडिया पर देखी जाने वाली नकली और एडिटेड फोटोज और वीडियो के झांसे में नहीं आना चाहिए और यह नहीं सोचना चाहिए कि यही सच हैं। इन्हें दूसरों से प्रेरणा लेनी चाहिए, लेकिन अपनी सफलता या असफलता से खुद को परिभाषित नहीं करना चाहिए। यदि यह अपने लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो इन्हें स्ट्रेस, एनज़ाइटी महसूस नहीं करनी चाहिए या मृत्यु के बारे में नहीं सोचना चाहिए। इन्हें याद रखना चाहिए कि ज़िन्दगी एक यात्रा है, कोई मंजिल नहीं और उनकी अपनी गति और रास्ता है।

 

         सोशल मीडिया एक शक्तिशाली उपकरण है जिसका इस्तेमाल अच्छे या बुरे दोनों के लिए किया जा सकता है। यह लोगों को एक साथ ला सकता है, या इन्हें तोड़ सकता है। यह इन्हें एज्यूकेट, इंटरटेन, इम्पावर या मिसइन्फोर्मेशन, मेनीपुलेट और नुकसान पहुंचा सकता है। यह हमें खुश या दुखी कर सकता है, तो इस से हम बेहतर या बदतर भी बन सकते है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल किस तरह से करते हैं, और खुद पर कैसे प्रभावित होने देते हैं।

Gen Z सोशल मीडिया से सबसे ज्यादा प्रभावित पीढ़ी है। यह अपने सोशल मीडिया के यूज़ को सीमित करके, उनकी ऑफ़लाइन गतिविधियों ज्यादा कर इस प्रभाव को कम कर सकते है। याद रहें आदर्श ज़िन्दगी एक भ्रम है, अपने खुद के बेस्ट वर्सन बनो।


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