Gimmick Marketing in Smartphone: क्या टूथपेस्ट में नमक सच में काम का है?

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Gimmick Marketing in Smartphone: क्या टूथपेस्ट में नमक सच में काम का है?

Gimmick Marketing in Smartphone: क्या टूथपेस्ट में नमक सच में काम का है?

  • क्या आपके phone में टाइटेनियम है?
  • क्या आपके कोलगेट में नमक है?
  • क्या आपके फ़ोन में जुग-मुग डिस्को लाइट है?

इस तरह की Gimmick Marketing की जाती है जहाँ पर आपको स्मार्टली बेवकूफ बनाया जाता है। जिसमें एप्पल सबसे प्रो है।

विडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें 

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1. Titanium in Phones

अब एप्पल के पास बेचने के लिए कुछ नहीं था, तो फ़ोन में उसने टाइटेनियम की बॉडी दे दी। टाइटेनियम अच्छी क्वॉलिटी की धातू है, लेकिन इस स्मार्ट फ़ोन में ये पूरी तरह से यूज़लेस है, जिसके लिए पैसे देने की कोई जरूरत ही नहीं है।

मैं साबित कर सकता हूं, टाइटेनियम ₹3000 प्रति किलो की धातु है, और वही एल्यूमीनियम ₹80 किलो की धातु है। तो सबसे पहले तो कंपनी वाले आपसे टाइटेनियम का पैसा जरूर लेंगे।

इसके अलावा टाइटेनियम होने से फ़ोन में क्या फायदा है? तो फ़ोन में टाइटेनियम होने से सिर्फ इतना फायदा हैं, की उसका वजन 20 ग्राम कम हो गया है और फोन थोड़ा सा मजबूत हो गया है। तो 20 ग्राम कम होना उतना जरूरी नहीं है क्योंकि ऐसा तो नहीं था ना की तुम पहले 100 किलो का फ़ोन लेके घूम रहे थे और अब वो 50 किलो का हो गया है। या पहले तुम्हें रिक्शा करके फोन उठा के ले जाना पड़ता था, पर अब तुम पैदल ले के जा पाते हो, पॉइंट नहीं है ना? तो फिर जो वजन हल्का होने का कोई फायदा ही नहीं है।

दूसरी बात, 93% लोग अपने फ़ोन में कवर चढ़ा के रखते हैं और वो कवर खुद 25 से 30 ग्राम का होता है। तो ज़ाहिर है इस फोन पर भी कवर चढ़ाएंगे, तो तुम्हारा 20 ग्राम टाइटेनियम की वजह से वजन कम होना तो बेकार गया। हाँ, स्पेस क्राफ्ट में टाइटेनियम ज़रूर इस्तेमाल होता है, पर वहाँ सच में जरूरत है। वहाँ 20 ग्राम में करोड़ों का फर्क पड़ जाता है। पर यहाँ पर दो–ढ़ाई हजार टाइटेनियम के लिए फालतू देने पर कुछ मिल भी नहीं रहा है।

JerryRigEverything की विडिओ में दिखाया गया की आईफोन 15 की स्टोरीज सब से कच्ची सीरीज है, जो की जल्द ही टूट रही है। अब इतने मजबूत टाइटेनियम का क्या करें। बॉडी मजबूत है, लेकिन डिस्प्ले तो अब भी कमजोर हैं ना? जो गिरने पर टूटेगी ही टूटेगी।

यहाँ बात केवल वजन कम करने और मजबूती की है ना? वजन कम होना तो फायदेमंद है ही नही, हमारे पास और भी सस्ते ऑप्शन है। हम टेम्पर्ड ग्लास लगा लेंगे, बढ़िया से कवर चला लेंगे, उनसे प्रोटेक्शन हो जाएगी।

अरे भैया टाइटेनियम के पैसे लेने की बजाय तुम हमसे पैसे लो, लेकिन बदले में तीन 4 साल का एक्स्ट्रा सपोर्ट और दे दो। या फिर बैटरी ग्रिफिन पे काम करो। जो की फास्ट है, अच्छी है, देर तक चलती है या कम से कम केवल अपने डब्बे में चार्जर ही दे दो फिर से, इतना भी बहुत है। पैसे ले रहे हो तो कुछ ऐसा फीचर दो जिसे हम ऐक्चूअली यूटिलाइज करते हैं। जो टाइटेनियम है, वो हम एक्चुअल यूटिलाइज नहीं कर रहे हैं और उसके पैसे भी हम दिए जा रहे हैं।

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2. फोल्ड की कच्ची टेक्नोलॉजी

2023 में Samsung फिर से अपने नए folding phone के साथ आपको लूटने के लिए आएगा। अब आप शायद कहो, भाई फोल्ड तो बढ़िया बात है, इतना अच्छा लगता है। तो हाँ बस अच्छा ही लगता है। दरअसल फोल्ड अपने आप में ड्यूरेबल नहीं है। हर पांचवें–छठे इंसान को सैमसंग फोल्ड को लेके प्रॉब्लम ही आ रही है। दो फोन तो मेरे खुद के खराब हो गए। हजारों ट्विटर पर आपको रोते लोग मिल जाएंगे जिनके फोल्ड में प्रॉब्लम आ रही है।

ये फोल्ड की गलती नहीं है। फोल्ड और उसकी display अपने आप में कमज़ोर है। केवल साल–डेढ़ साल में ये रोने लग जाता है। बेहतर है कि आप ₹1,50,000 के फोल्ड की तरफ ना जाए। क्योंकि इतना महंगा होने के बाद भी इसमें ऐसी कोई खास बात नहीं है? बस दिखा दोस्त यार के सामने दिखावा ही कर सकते है। और वही उतने ही फीचर में एक ब्रिक फ़ोन लेने पर आप काफी कम पैसे देंगे।

बेहतर होगा की आप एक ₹1,50,000 के fold होने वाले फोन बजाए एक ब्रिक फोन ले लो, और कुछ बड़ा पढ़ना है तो उसके लिए कोई टैब ले लो, वो फिर भी सस्ते और अच्छे पढ़ेंगे।

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3. बेफिजूल की 8K रिकॉर्डिंग

ऐसा नहीं है कि ऐप्पल ने कोई पहली बार गेम किया है। टेक इंडस्ट्री में तो भर भर के गिमिक है। Samsung S23 Ultra में 8k वीडियो रिकॉर्डिंग है, पर अफसोस की बात तो ये है ना ही Netflix पर, ना ही YouTube पर या ना ही किसी और स्टीमिंग प्लेटफॉर्म पर, 8k में कोई कंटेंट ही मौजूद नहीं है। तो अब हम इस 8k का क्या करेंगे? लेकिन उसके पैसे तो हमने दिए हैं और 8k वीडियो रिकॉर्डिंग कर भी नहीं रहे हैं।

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4. 200X Zoom की बुरी क्वालिटी

What should your smartphone camera have to take good photos?

बाकी छोटे मोटे गिमिक तो आपको मिलते ही है, जैसे 200x Zoom, और zoom में भी वो ऑप्टिकल zoom नहीं, डिजिटल zoom होता है। डिजिटल ज़ूम का मतलब है, की बस फोटो को चौड़ा कर दिया। जैसे किसी दूर से आदमी को आते हुए आप आंख मीच कर देखें, तो वो दिख ने लगेगा, ये भी एक zoom ही है।

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5. मेगापिक्सल का अच्छी फोटो से कोई सम्बन्ध नहीं

A 100 Megapixel Camera is nothing more than a lie

अभी कुछ साल पहले मेगापिक्सल का लड़ाई शुरू हो गई थी। 48mp तो कही 250mp, पर असल में मेगापिक्सल कुछ होता ही नहीं है। मेगापिक्सल का मतलब है, की बस तस्वीर कितनी बड़ी आ सकती है। इसका मतलब यह नहीं है की तुम टॉम क्रूज़ ही लग जाओगे। सिंपल पूरा कैमरा मॉड्यूल होता है तब जाके एक कैमरा अच्छी फ़ोटो ले पता है, केवल मेगापिक्सल से कुछ नहीं होता है।

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6. वायर वाली वारेलेस चार्जिंग

हाल ही में वायरलेस चार्जिंग भी चल रहा है, जिसमें वायर भी होती है। वैसे भी हम वायरलेस चार्जर बहुत स्लो चार्ज करता है, तो लोग उसे ना के बराबर ही इस्तेमाल करते है। और एक चार्जर तार के साथ है तो इसे वायर लेस कहने का आखिर क्या औचित्य है?

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7. फोन पर डिस्को लाइट

Beyond the Deceptive Disco Lights: The Hidden Truth about Nothing Phones

Nothing Phone कुछ नहीं तो आगे–पीछे डिस्को लाइट ही दे दी। और ये phone बिका ही इसलिए है, क्योंकि उसमें डिस्को लाइट्स थी। डिस्को लाइट का प्रैक्टिकली कोई काम ही नहीं था। इस बात के लिए तुम एक्स्ट्रा पैसे दे रहे जिसमें तुम कोई और एक्स्ट्रा यूटिलिटी ले सकते हो।

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Gimmick Marketing के अनगिनत उदाहरण

बाकी दुनिया भी ये करती है, खास तौर पर कंज्यूमर गुड इंडस्ट्री में तो ये बहुत ही भर भर के पाया जाता है।

1. कोलगेट में नमक: आपने सुना होगा, क्या आपके कोलगेट में नमक है? क्या आपके कोलगेट में कोयला है? जबकि 1985 के कोलगेट के ही एक ऐड में बताया गया था की नमक और कोयला आपके दांतों के लिए नुकसानदेह होता है, और आज वही नमक और कोयले के नाम पर अपना कोलगेट बेच रहे हैं।

Gimmick Marketing in Smartphone: क्या टूथपेस्ट में नमक सच में काम का है?

2. SR टूथपेस्ट: 23 सितंबर 1955 में UK में SR टूथपेस्ट के एक ऐड में दिखाया गया की इनका टूथपेस्ट आपके मसूड़ों की मजबूती के लिए बहुत बढ़िया है, और एक बिना किसी लॉजिक का चार्ट दिखाया गया, की इस तरह से टूथपेस्ट काम करता है, जिसके बाद इसकी सेल आसमान छूने लगी। लेकिन असल में कुछ expert तो ये भी कहते है की टूथपेस्ट की जरूरत ही नहीं है, आप सिर्फ खाली ब्रश भी कर लो, तो भी आपके दाँत साफ हो जाते है।

3. बिना आटे की आटा ब्रेड: इसके और भी कई उदाहरण है जैसे 100% whole wheet bread। इसमें कोई 100% गेहूं का आटा नहीं होता, बल्की इसमें मैदा मिला हुआ होता है।

4. चीनी से भरी Protine Bar: Protine Bar सुन ने में लगता है प्रोटीन से भरा होगा, लेकिन इसके अंदर बाकी के सामान बहुत हानिकारक होते है, और भर भर के चीनी भारी होती है, जो को और नुकसान देय है।

5. Smart AC: Smart AC के लिए आप एक्स्ट्रा पैसे देते है, जिसके लिए हमें अलग से 5 से 6 हजार का Alexa लेनी पड़ती है, 700 से 800 का wifi हर महीने का देना पड़ता है वो अलग। जो काम रिमोट से भी हो सकता है, उसके लिए क्यों 5 से 6 हजार ज्यादा देने। बल्की वो पैसा ज्यादा एनर्जी सेविंग ac में लगाया जाए।

ऐसे ही अनगिनत उदाहरण है। इनके फिचर्स कमाल के है पर कोई काम के नहीं। हमें कोई भी प्रोडक्ट लेने से पहले अपने आप से पहले सवाल करें की जिस फीचर का इतना शोर है, क्या वो सच में आपके काम का भी है? क्या उस पर पैसे लगाना ठीक रहेगा? और फिर जवाब आपको खुद मिल जायेगा।

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जब आप एक रेस्ट्रॉन्ट में जाते हो और कहते हो भाई थाली कितने की मिलेगी? तो उन्होंने कहा की दो रोटी और एक कटोरी सब्जी मिलेगी। अगर स्टील की प्लेट में लोगे तो ₹50 की मिलेगी, अगर टाइटेनियम की प्लेट में लोगे तो ₹150 मिलेगी और अगर डिस्को लाइट के साथ भी लोगे तो ₹200 मिलेगी, तो तुम क्या करोगे? अरे हमें साधरण प्लेट में दे दो, और इसके बदले तीन रोटी एक्स्ट्रा सब्जी दे दो, ये ही तो कहोगे ना?

तो डिस्को लाइट या टाइटेनियम के बदले हमें एक्स्ट्रा चीजे मिलनी चाहिए ना? जिसे चार्जर मिल जाए, एक्स्ट्रा दो 3 साल का सपोर्ट मिल जाए, बैटरी अपग्रेड मिल जाये, फास्ट फास्ट चार्जिंग मिल जाये। ये फीचर हम असल में इस्तेमाल करते हैं, उसके बजाय फालतू फंड के गिमीक दे कर आप को लूट लिया जाता है।


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