Phone Eavesdropping: क्या आपका फोन आपकी बातें सुन रहा है?

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Phone Eavesdropping: क्या आपका फोन आपकी बातें सुन रहा है? 👂

क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि आपके आसपास की बातचीत आपके फोन तक पहुंच रही है? क्या आपको कभी ऐसा अनुभव हुआ है कि आपने किसी चीज के बारे में बात की और फिर आपको उसी चीज के एड दिखाई देने लगे? क्या यह सिर्फ एक संयोग है या आपके फोन में कुछ गड़बड़ है?

कहा जाता है, की फोन में मौजूद ऐप्स चुपके से हमारी बातें सुन रहे है, ताकि वो हमें टारगेटिड एड्स दिखा सके। टारगेटिड एड्स किसी भी ऑनलाइन एड कैंपेन के लिए बेहद जरूरी है। इस से आपको अपने फोन पर वही एड्स दिखाई देते है, जो आपके लिए आपकी उम्र, क्षेत्र, लिंग, भाषा, रुची, आदि के अनुसार ही बने हो।

आमतौर पर एडवरटाइजर “Cookies” और “Tracking Pixels” जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जो आपके ब्राउज़िंग हैबिट को ट्रैक करते हैं, और आपको अलग–अलग वेबसाइटों पर टारगेट एड्स दिखाते हैं।

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अनेक लोगों के अनुभव:

अगर आपने भी यह महसूस किया है तो सिर्फ आप ही अकेले नहीं हैं, बाकी और लोगों ने भी अपने इस से जुड़े अनुभव की गाथा सांझा की है। Quora पर, कई लोगों ने ऐसे अनुभव साझा किए हैं:

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1. कॉल भी सुन रहा है: एक व्यक्ति ने बताया की अपने मां से फोन पर बात करते हुए वो अपने ट्रांसफर के बारे में बता रहे थे, और कहा मैं अपनी स्कूटी भी साथ ले कर जाऊंगा, जिस पर मां ने कहा कि उसके लिए उसे RTO से No Objection Certificate (NOC) लेनी होगी। कॉल के बाद, गूगल पर सिर्फ “How to obtain” लिखते ही आगे से ” NOC from RTO” सजेस्ट करने लगा। जिसमें उसे पहले लगा की शायद लोग सबसे ज्यादा यह सर्च करते होंगे। 

google search result

लेकिन Incognito Mode में सर्च करने पर NOC या RTO का नामों निशान दूर–दूर तक नही था।

google search result in Incognito mode

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2. दोस्त का नाम: एक व्यक्ति ने बताया कि वे अपने दोस्त से आमने सामने “Fonzie” नाम के एक दोस्त के बारे में बात कर रहे थे, जो “Happy Days” नाम के टीवी शो से प्रेरित था। उन्होंने इस बारे में न ही गूगल पर सर्च किया ना ही फोन पर टाइप किया, लेकिन अगले ही दिन उन्हें Happy Days के लिंक और गूगल डिस्कवर फीड में “Fonzie” शब्द से संबंधित आर्टिकल दिखाई देने लगे।

quora page

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3. रोड ट्रिप: एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वे अपनी पत्नी के साथ बैठ कर रोड ट्रिप पर जाने की योजना बना रहे थे, जहां बातों बातों में वो लोग गैस के प्राइज, स्नैक्स, कार रेंटेल्स, आदि की बात भी करने लगें। लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें गैस स्टेशनों, कार किराए पर लेने और सस्ते होटल बुकिंग के एड दिखाई देने लगे।

phone eavesdropping

4. चाइनीज फूड: इसी तरह, अपनी बेटी से चाइनीज फूड के बारे में बात करने के बाद उनका फोन चाइनीज फोन के एड से भर गया।

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5. ढूंढ निकाली किताब: ऐसे ही एक और व्यक्ति ने बताया, की वो अपने दोस्त से साथ बैठे किसी पुरानी किताब (How to treat nausea in Medieval Scotland, published in 1881) पर चर्चा कर रहे थे, और उन्होंने वेबसाइट का नाम ले कर बताया की ये वहा मिलेगी, और किसी जादू की तरह उस वेबसाइट और किताब का एड फोन पर आने लगा।

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क्या Google और Facebook झूठ बोल रहे हैं?

Google और Facebook ने इस बात से इनकार किया है कि वे टारगेट एड्स के लिए फोन के माइक्रोफोन का इस्तेमाल करते हैं। वे दावा करते हैं कि एड यूजर्स के सर्च हिस्ट्री, ऐप यूसेज और लोकेशन जैसे अन्य कारकों पर आधारित होते हैं।

लेकिन इस तरह के किस्से हमें इनपर यकीन कर पाने से रोकते है।

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कैसे बचाए अपनी प्राइवेसी को?

इसके आसार काफी ज्यादा दिख रहे है की आपका फोन चुपके–चुपके आपकी बात सुन रहा है। अब कैसे में हम क्या कर सकते है? ऐसा तो नहीं है की फोन ही फेक दें या इस्तेमाल की करना बंद कर दे। आज के ज़माने में ऐसा कर पाना मुश्किल खड़ी कर सकता हैं।

तो आप अपने स्तर पर, अपनी प्राइवेसी की रक्षा के लिए नीचे दिए गए क़दम उठा सकते है:

 

phone eavesdropping prevention

1. Microphone Permissions करें Manage

🎙 माइक्रोफोन के एक्सेस को इंडिविजुअल ऐप्स के लिए रिव्यू और रेस्ट्रिक करें: अपने फोन की सैटिंग में जा कर माइक्रोफोन को परमिशन को चेक करें। कोई ऐसा संधिद्ध ऐप जो माइक्रोफोन इस्तेमाल कर रहा है, जिसकी आपको जरूरत भी नहीं, तो ऐसे ऐप्स से माइक्रोफोन की परमिशन डिसेबल या रेस्ट्रिक्ट करें। .
📍 ज़रूरत न होने पर लोकेशन ऑफ़ रखें: लोकेशन का डाटा आवाज के डाटा से मिल कर ज्यादा खतरनाक हो सकता है, तो उपयोग में ना होने पर लोकेशन डिसेबल रखें।
🤖 वॉइस असिस्टेंट को ट्रिगर करने से बचें: Voice assistant को जगाने के लिए स्ट्रांग शब्दों का इस्तेमाल करें और ऐसे मामूली शब्दों को इस्तेमाल न करें जिससे आम बातचीत में असिस्टेंट एक्टिवेट हो सकता है।

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2. लिमिट डाटा शेयरिंग

📤 सोशल मीडिया जैसे ऐप्स की प्राइवेसी सेटिंग रिव्यू कर एडजस्ट करें: ऐसे किसी भी माइक्रोफोन लोकेशन और कोई अन्य डाटा के एक्सेस को रिस्टिक करें जिससे आपको पर्सनलाइज्ड एडवरटाइजिंग भेजी जा सकती है।
🌐 प्राइवेसी तोड़ने वाले ऐप्स का ऑल्टरनेट इस्तेमाल करें: ऐसे ऐप्स जो प्राइवेसी का खंडन करती हो, की जगह आप उसे ब्राउज़र या सर्च इंजन में ही खोलें।

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3. सेंसिटिव बातों के लिए करें स्विच ऑफ

📵 यदि आपको लगता है कि आप कुछ ऐसी सेंसिटिव बातें कर रहे हैं, जिसका बाहर जाना बिल्कुल भी सही नहीं है। तो ऐसे में बेहतर होगा, कि आप किसी भी शंका में ना पड़े, और उसे वार्तालाप के दौरान अपना फोन स्विच ऑफ रखें।

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आखिर में यह कहना मुश्किल है, की हमारा फोन हमारी बातें सुनता है, क्योंकि इसका कोई प्रमाण इन फोन की कंपनी या ऐप्स से नहीं मिलता है। पर लोगों की बताई गई बातें और उनके अनुभव जरूर इस बात पर बहुत बड़ा संदेह पैदा करते हैं।

जिससे यह कह पाना मुश्किल है कि आपका फोन आपकी बातें नहीं सुनता है।

लेकिन सतर्क रहना और अपनी प्राइवेसी की रक्षा के लिए कदम उठाना हमेशा बेहतर होता है।

तो किसी भी नए ऐप को इंस्टाल करने से पहले, उसकी प्राइवेसी और परमिशन देखना न भूलें, वरना पता लगा वो नया ऐप आपके फोन में जेम्स बॉन्ड बन कर आया है।


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