Planned Obsolescence: कैसे Apple और अन्य कंपनियां हमें ठगती है?

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Planned Obsolescence: कैसे Apple और अन्य कंपनियां हमें ठगती है?

Planned Obsolescence: कैसे Apple और अन्य कंपनियां हमें ठगती है?

iPhone 13 का नया IOS 17 update आ गया है और आपको अपडेट नहीं करना है। क्योंकि इसमें काफी शिकायतें आ रही है। इसके बाद आपका फ़ोन slow हो जाएगा, क्योंकि Apple कंपनी की ये सीक्रेट, चालू और काली करतूत है।

इसी तरह iPhone 14 का भी अपडेट आएगा। उसे भी तुम अपडेट मत कर लेना, क्योंकि वो भी slow हो जाएगा। कंपनी सिर्फ चाहती है की आप उनका नया लेटेस्ट मॉडल खरीदे और पुरानो को नाले में फेंक दें।

इसे कहते है Planned Obsolescence। ये केवल ऐप्पल कंपनी नहीं करती है, सदियों से चलता आ रहा है।

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What is Planned Obsolescence?

(Planned Obsolescence क्या होता है?)

Planned obsolescence का मतलब होता है की, आपने जो भी प्रॉडक्ट खरीदा है, उसकी एक लिमिटेड लाइफ होती है, और उस समय सीमा के बाद वो खराब हो जाता है। फिर कंपनी आपको पुश करती है कि आप उनका नया प्रॉडक्ट खरीदो और पुराने वाले को फेंक दो। और चाहती है की पुराना product ज्यादा ना चले। इससे उनका बिज़नेस grow होता है।

आपने देखा है कि पुराने समय के कुछ product ऐसे हैं जो आज तक काम करते हैं, वो खराब ही नहीं होते। piano मान लो, पहले जो कैमरा बना था है वो मान लो, आपने सुना है की जो आपकी मम्मी, पापा या दादा दादी की शादी में कोई पंखा मिला था बजाज का, वो चलता रहता है, 10-10 साल तक खराब नहीं होता। बल्की नोकिया के कुछ फोन 10-10 साल तक खराब नहीं होते और आज कल नए फ़ोन को देखो तो 3 साल में तो उनकी हालत खराब हो जाती हैं, कुछ ना कुछ अजीब सा हो जाता है।

बहुत सारे पुराने प्रॉडक्ट ऐसे हैं जो चलते आए हैं, चलते रहे हैं और शायद चलते रहेंगे। लेकिन अभी हाल ही के कंपनी के प्रॉडक्ट में आप देखो तो वो प्रॉडक्ट लिमिट समय के लिए होते हैं और फिर खत्म हो जाते हैं। इसे कहते है Planned Obsolescence,  ये बिज़नेस की एक काली strategy  है की भाई लोगों को खूब मूर्ख बनाओ।

ये सबसे पहले 1920 में आया था। एक बल्ब की कंपनी थी जिन्होंने बल्ब लॉन्च किया। उससे पहले जो बल्ब बनते थे, वो ज्यादा टाइम तक चलते थे। बल्कि वो चाहते थे कि हम ऐसा बल्ब बनाएँ जो खराब ही ना हो। और इंजीनियर ने बनाया भी। लेकिन इससे उनका बिज़नेस इफेक्ट हुआ, तो उन्होंने इंजीनियर से कहा कि इसकी लाइफ टाइम को ना कम करो। उसे 1000 घंटे तक के लिए फिर बनाया गया।

बल्कि 1920 में जनरल मोटर्स की एक कंपनी है जिन्होंने कार का नया मॉडल लॉन्च कर दिया, ताकि लोग अपने पुरानी को discard करें और नया खरीदे।

लंबा इतिहास है Planned obsolescence का। कंपनी ने कहा कि लोगों को अपने नए फर्नीचर लेने चाहिए। बल्कि फैशन में बहुत ज्यादा होता है। out of fashion कह दिए जाते हैं वो कपड़े जो कि खराब तक नहीं होते।

और इसमें सबसे गंदा गेम खेलता है Apple। पहले बताना चाहता हूँ इसमें तीन तरह के Planned Obsolescence होते हैं।

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1. Design

सबसे पहले होता है Design। product का Design ऐसे किया जाता है की वो अपने आप ही अप्रचलन में आ जाये। जैसे, जो भी प्रॉडक्ट है उसकी कीमत कम कर दी जाती है और जो साथ में उसके साथ लगता है, complimentary goods हो जैसे की प्रिंटर, उस में cartage लगती है। या फिर एक कॉफी मशीन होती है, जिसमें पोर्ट्स लगते हैं। इसी तरह बहुत सारे प्रॉडक्ट जो साथ में कॉंप्लिमेंटरी लगते है तो प्रॉडक्ट को सस्ता कर दिया जाता है।

और जो कॉंप्लिमेंटरी साथ में लगेगा, जो प्रॉडक्ट है, अगर वो खत्म हो गया है या कम भी रह गया तो बंद हो जाएगा। जैसे printer में यदि कोई cartage कम हो गई है, तो प्रिंटर को ऐसे डिजाइन किया जाता है कि प्रिंटर काम करना बंद कर देता है, की इससे पहले कार्टेज भर के लाओ, तब हम इसको चलायेगे, वरना नहीं चलेगा। तो यह भी एक Planned obsolescence का एक उदाहरण है।

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2. Pushing Perceived obsolescence/Irreparable

दूसरा है pushing perceived obsolescence/irreparable product। इसमें क्या होता है की, जो भी प्रॉडक्ट कंपनी ने बनाया है वो उसे कुछ ऐसा बनाता है की या तो आप रिपेर ना करा सको। छोटी मोटर डिफेक्ट भी हो जिसे रिपेर किया जा सकता है, कंपनी मना कर देती है की रिपेर नहीं करना है, नया ले लो। या नया निकाल के, पुराने को slow कर देते हैं, जिससे तुम्हें लगता है की ये पुराना वाला पुराना ही हो गया।

Apple कंपनी उसमें गंदा गेम खेलती है। 2016 में तो Apple को 27 मिलियन डॉलर की पेनल्टी भी देनी पड़ी थी। क्योंकि अपने नए आईफोन बेचने के लिए, उसने अपने पुराने iPhone बिना customers को बताएं, स्लो कर दिए थे। और लोगों को लगा कि हमारा iPhone ही खराब हो गया है।

बल्कि 2001 में एप्पल ने iPod लॉन्च किया, जिसमें irreplaceable दी कि बैटरी ही नहीं बदलेगी, अंदर ही रहेंगी। बल्कि ऐप्पल ने 2007 में पहला आईफोन दिया जिसमें non-removable बैटरी थी। वही नोकिया बैटरी खराब हो गई, तो आराम से बदल ली। ज्यादातर फ़ोन में बैटरी खराब होती है, बैटरी बदली जा सकती है, फ़ोन ठीक हो सकता है। हम पहले बैटरी लगा भी लेते थे, ले ली दुकान से मिल जाती थी, लेकिन अभी तुम फ़ोन को खोल नहीं सकते। बैटरी बदल नहीं सकते। लोग डरा देते हैं कि अगर तुम बैटरी खुद से बदलोगे तो हम warranty नहीं देंगे।

तो ये जो गंदा गेम है, Apple ने शुरू किया और बाकी सारी कंपनियों ने नॉन रिमूवेबल बैटरी दे दी। क्योंकि अगर बैटरी में प्रॉब्लम आना शुरू हो जाती है तो अधिक लोग सोचते हैं की जीतने का ठीक कराऊंगा, नया ही आ जायेगा। ये कंपनी में आपके दिमाग में बिठा दिया है।

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3. Drop Support

और तीसरा बहुत ही ज्यादा चलता है जिसे कहते हैं Drop  Support। आम तौर पर कंपनी आपको 4 साल तक या 5 साल तक भी अपडेट देती है। जैसे Samsung या One Plus 4 साल तक दे रही है, Apple आपको 5 साल तक दे रही है और कुछ कंपनी  3 साल तक दे रही है। यानी आप ले लो हमारा फ़ोन, हम आपको 3 साल से 4 साल तक अपडेट देते रहेंगे और उसके बाद उसके बाद तुम जाने। तुम्हारा फ़ोन खराब हुआ या ना हुआ, उससे हमें कोई मतलब नहीं है। हम तुम्हें अपडेट नहीं देंगे। क्योंकि हमने अपना नया फ़ोन लॉन्च कर दिया होगा तो तुम उसे खरीदना, क्योंकि तुम्हारा फ़ोन outdated हो गया है।

आपको टीवी दे दिया जाता है, एक दो साल उसका अपडेट दिया जाता है और फिर तुम्हारे मुँह पे मार दिया जाता है कि हमें नहीं पता अब हम से मत पूछो। कई बार फ़ोन को repair करवाने जब सर्विस सेंटर जाते है, तो वो ख़राब पार्ट को रिपेर करने की बजाय चेंज करने की बात करते है।

अभी मैंने सैमसंग फोल्ड की वीडियो बनाई थी, जहां उन्होंने कहा इसकी पूरी डिस्प्ले ही चेंज होगी। अरे भाई रिपेर करो ना, और नहीं हो रहा है तो पैसे भी मुझसे ही मांग रहे हैं। और उसके पैसे इतने होते है की उतने में आप वही phone नया ले सकते हो।

पर आप वहीं फ़ोन नहीं लोगे, क्योंकि ये तो फिर पुराना मॉडल हो चुका होगा। जब Fold  5 आ चुका है तो उस ही कीमत पर Fold 3 repair करवाने के बजाए, मैं नया ही ले लूँगा ना।

तो इस ही तरह दिमाग में Planned obsolescence को कुछ इस तरह बैठा दिया गया है, की तुम्हारा जो भी प्रॉडक्ट है वो ख़राब हो चुका है। चाहे वो खराब हुआ है, चाहे वो खराब नहीं हुआ है। तुम्हें नया लेने के लिए push किया जाता है।

बल्कि Apple ने तो ऐसा कर रखा था, कि उसके फ़ोन को repair भी नहीं किया जा सकता था। एक बंदा iPhone repair कराने बाहर दुकान से गया, और ठीक करवाने के बाद तो मैसेज आया की iPhone  कंपनी में लेके जाओ बाहर ठीक मत करावाओ, क्यों हमारा फ़ोन, हम कहीं भी ठीक कराए?

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Right To Repair Petition

इसलिए 2021 में Right To Repair Petition डाली गई और इस पर काम किया गया, जो कि बहुत अच्छी बात है। अरे हमारा फ़ोन है, हम रिपेर कराये या ना कराये, हमारी मर्जी है, तुम कौन होते हो बताने वाले कि सर्विस सेंटर लेके आओ।

क्योंकि सर्विस सेंटर लेके आयेंगे, तो तुम कहोगे, इसका Board खराब है, फिर इसका Display खराब है, फिर तुम इंसान खराब हो, तुम नया फ़ोन ले लो हमारा, तुम अपना रोना शुरू कर दोगे और push हो जाएंगे की हम नया फ़ोन ले ले।

तो इस तरह एक बड़ा स्कैम चल रहा है। और ये सब प्रॉडक्ट पर चल रहा है। आपका कोई भी tech product 3 साल, 4 साल तक ढंग से टिकता नहीं है। पंखे भाई साहब एक 1 साल 2 साल में बंद हो जाते हैं। आपकी LED Bulb warranty के 10 दिन बाद ही खराब हो जाते है। जो की सब जान बूझ के किया जाता है।

क्या करना चाहिए?

  1. अगर product repair करवा कर चल सकता है, तो repair करवाओ।
  2. सिर्फ पुराना product ना चल पाने की स्थिति में ही नया product खरीदें, पुराना model outdated होने की वजह से नहीं।
  3. पुराने phone को बेच दो।
  4. हो सके तो Refurbished phone खरीदो।

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