Pollution Control Technology: टेक से होगी अब प्रदूषण की छुट्टी

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Pollution Control Technology: टेक से होगी अब प्रदुषण की छुट्टी

Pollution Control Technology

क्या आपको मालूम है? एक साफ हवा में सांस लेने के लिए AQI या बोलें तो हवा की क्वॉलिटी कितनी होनी चाहिए? 100 तक का AQI जीवन जीने के लिए उचित माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है दिल्ली का AQI इस वक्त अभी क्या है?

 

Air Quality Index Chart

दिल्ली जिसे हम भारत का दिल कहते है, जो अपने इतिहास, विविध संस्कृति, खाने, पहनावे के मशहूर है। पर दिल वालो के इस शहर में कोहरा छाया हुआ है। काश यह कोहरा इसीलिए होता, की ठंड बहुत है, नवंबर में पर ये काला छाया हुआ धुआं सिर्फ ज़हरीली गैसें है, Air Pollution हैं। जो सिगरेट से भी ज्यादा खतरनाक है, और धीरे–धीरे आपकी उम्र कम कर रही हैं।

एक अनुमान के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण से हर साल लगभग 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है; यह भारत में पांचवां सबसे बड़ा हत्यारा है।

आज के इस ब्लॉग में हम, दिल्ली के प्रदूषण को टेक्नोलॉजी की मदद से जानेंगे। हम इसके कारणों पर चर्चा करेंगे ही साथ ही इसके कुछ सॉल्यूशन भी आपके सामने लाएंगे। प्रदूषण को दूर करने के लिए आज के इस दौर में, जब 2024 आने ही वाला है, हम, आप और सरकार क्या क्या कर सकती है, सब जानेंगे। इसी के साथ वर्तमान में किस तरह नई तकनीक का इस्तेमाल कर, इसके लिए कार्य किया जा रहा है, उस पर भी थोड़ा प्रकाश डालेंगे।

उम्मीद है 2024 के नए साल के साथ आपको दिल्ली में प्रदूषण के साथ–साथ उसके इस नए दुनिया के उपाय से जुड़े सारे जवाब यही मिल जायेंगे। सबसे पहले नीचे दिए गए डाटा को देखे।

 

Delhi Air Quality को समझना

100 से नीचे AQI ठीक–ठीक माना जाता है, 200 से नीचे AQI पर कुछ लोगों को हेल्थ से संबंधित दिक्कतें हो सकती है, 300 से नीचे AQI को बहुत खराब और सभी लोगों की हेल्थ के लिए खराब माना गया हैं। 500 से नीचे AQI को खतरनाक और सभी लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य के खतरे हैं।

शुरुआत में हमने एक सवाल किया था, तो क्या आपको दिल्ली का AQI इस वक्त क्या है? तो 2023 में नवंबर के महीने में दिल्ली का AQI 999 तक गया है। यह 300 से उप्पर AQI जाने पर ही जहां हवा बेहद खतरनाक और जानलेवा बन जाती हैं, वहां दिल वालो की दिल्ली में 999 AQI के आंकड़े दिखाई दे रहे हैं। लेकिन यहां इसी के साथ बहुत बुरा और बड़ा ट्विस्ट है, अफसोस के साथ आपको बताना पड़ेगा की AQI मापने की जो मशीन होती है, “Air Quality Manager”, उसकी सीमा सिर्फ 999 तक ही होती है। यानी माना जाता है की 999 से उप्पर हवा खराब हो ही नही सकती, और यहां 999 मानो जैसे आम बात है।

Delhi current AQI Chart

इसलिए अगर AQI अगर 999 दिखा रहा है, तो ये खतरे की घंटी है, क्योंकि असल AQI इस से और कहीं ज्यादा हो सकती है।

 

दिल्ली Air Quality के ख़राब होने के कारण

दिल्ली की बिगड़ती हुई हवा की क्वालिटी को कई तरह के कारणों से जोड़ा जा सकता है, जो शहर की विरासत की गहराइयों में बस गए हैं।

 

प्राकृतिक कारण

1. भागोलिक परिस्थिति

दिल्ली की landlocked geography भी इसके high pollution levels में योगदान देती है। राजस्थान या कभी–कभी पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाली हवाएं, इस एरिया में डस्ट ले जाती हैं, और हिमालय हवा के निकलने के रास्ते को बंद कर देता है, जिससे धूल और प्रदूषण इस एरिया में बिना किसी किराए के बस जाते हैं।

2. ठण्ड का मौसम

कम तापमान, शांत हवाएँ, और mix layer की कम ऊंचाई प्रदूषण को जमीन से बांधे रखती हैं, जिस से ये शहर घनी प्रदूषण की धुंध की चादर ओढ़ लेता है।

Delhi highway sounded by Pollution

कृतिम कारण

1. गाड़ियों और AC से निकलती हानिकारक गैसें

दिल्ली की सड़कों में ट्रैफिक जाम आम बात है, रोड में जैसे हर कोई रेस कर रहा है, है किसी को कहीं न कहीं जाने की जल्दी है, रोड खचाखच गाड़ियों से भरें हैं।

2. पराली जलाना

हरियाणा और पंजाब में जलाए जाने वाली पराली दिल्ली के लिए एक अभिशाप की तरह है। पराली जलाने से निकलने वाले धुएं में विषैले गैस जैसे Methane, Carbon Monoxide (CO), Volatile organic compound (VOC) और carcinogenic polycyclic aromatic hydrocarbons उत्सर्जित होते है।

 

कैसी थी 100 साल पहले दिल्ली की हवा?

Delhi Old photo of 1858

दिल्ली के वायु प्रदूषण संकट की गहराई को सही मायने में समझने के लिए, हमें टाइम में वापस जाना होगा लगभग 100 साल पहले और इसकी हवा की क्वालिटी की यात्रा का पता लगाना होगा। दिल्ली का आसमान हमेशा इस काले धुंध में नहीं घिरा था। एक साफ सास लेने लायक हवा से दिल्ली कई कारणों से आज ज़हरीली हवा वाला बन चुका है।

स्वतंत्र भारत के शुरुआती दशकों में, दिल्ली में बेहतर हवा की क्वॉलिटी थी। शहर अपनी हरी-भरी हरियाली और खुली जगहों के लिए जाना जाता था। हवा आज जितनी प्रदूषित है, उस टाइम बिल्कुल नहीं थी। यह एक ऐसा टाइम था जब शहर के निवासी एक अच्छी हवा में सांस ले सकते थे, और उन्हें किसी एयर प्यूरीफायर की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। हालाँकि, जैसे-जैसे साल बीते, दिल्ली जल्द ही औद्योगिकीकरण और शहरीकरण से गुजरी। शहर की ओर बढ़ने लगी और कई बदलाव के साथ गाड़ियों के इस्तेमाल में बढ़त हुई और औद्योगिक गतिविधियों और फैली। इन बदलावों ने धीरे-धीरे दिल्ली में आज के वायु प्रदूषण संकट को जन्म दिया।

 

टेक्नोलॉजी का आखिर वायु प्रदूषण में क्या काम है? (Tech Solutions for Air Pollution)

टेक्नोलॉजी वायु प्रदूषण प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं में एक ज़रूरी भूमिका निभाती है, जिसमें शामिल हैं:

A person is testing Air Quality with a device

1. मोनिटरिंग करने के लिए

टेक्नोलॉजी सेंसर और उपकरणों के नेटवर्क से हवा की क्वालिटी की रीयल-टाइम निगरानी की जा सकती है। यह प्रदूषक के लेवल, उनके सोर्स, टाइम और जगह के साथ कैसे अलग अलग होते हैं, पता करता है।

2. डाटा का ब्यौरा इक्कठा करने के लिए

एडवांस डेटा एनालिटिक्स टूल का इस्तेमाल हवा की क्वालिटी के डेटा को प्रोसेस्ड और एक्सप्लेन करने के लिए किया जाता है, प्रदूषण के पैटर्न और उत्सर्जन के संभावित सोर्स की पहचान की जाती है।

3. मॉडलिंग और पूर्वानुमान लगाने में

काम्प्लेक्स मॉडल विकसित किए जाते हैं ताकि भविष्य के हवा की क्वालिटी के लेवल का पहले से पाता लगाया जा सके, जिससे उत्सर्जन को कम करने और प्रदूषण की घटनाओं को कम करने के लिए एक्टिव तरीके अपनाये जाते है।

4. प्रदूषण नियंत्रण करने में

एयर प्यूरीफायर और स्क्रबर्स जैसी चीज़ों का इस्तेमाल कर के इनडोर और आउटडोर वातावरण में प्रदूषक के लेवल को कम करने के लिए किया जाता है।

 

भारत में कुछ प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए टेक स्टार्टअप

कई तकनीकी स्टार्टअप हवा प्रदूषण नियंत्रण पर पॉजिटिव प्रभाव डाल रहे हैं:

Plastic bottles ready to recycle, Tech startups pollution

1. Chakr Innovation

एक दिल्ली से शुरुआत हुई स्टार्टअप है जो एक डिवाइस बनाई है, जो डीजल जेनरेटर से आने वाले पार्टिक्युलेट मैटर को कैप्चर करता है और उसे इंक में बदल देता है। फिर यह इंक प्रिंटिंग कंपनियों को बेचा जाता है, जिससे एक सर्कुलर इकोनॉमी बनती है एयर पॉल्यूशन के लिए।

2. D&D Ecotech – Rainwater harvesting

यह  स्टार्टअप  घर परिवार और संगठनों को बारिश का पानी इकट्ठा करने में मदद करता है। D&D Ecotech अपने क्लाइंट्स की ज़रूरत के आधार पर अपने rainwater harvesting recharge structures भी डिज़ाइन करता है।

3. Banyan Nation – Recycling plastic

यह प्लास्टिक कचरे को इंडस्ट्रीज से उठाता है और उसको दोबारा इस्तेमाल के लिए रीसाइकल करता है। इसी के साथ अब आने वाले समय में यह रीसाइकल्ड प्लास्टिक में परफॉर्मेंस को बढ़ाने वाले एडिटिव्स भी डाल रहे हैं ताकि रीसाइकल्ड प्लास्टिक का लाइफसाइकल और भी लम्बा हो।

 

सरकार द्वारा पहल

भारत सरकार ने दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई पॉलिसी, नियम, और पहल भी शुरू की हैं। इनमें शामिल हैं:

Smog Towers in delhi

1. National Clean Air Programme (NCAP):भारतीय सरकार ने 2019 में शुरू किया, यह कार्यक्रम का उद्देश्य है कि 2024 तक भारत के 102 शहरों में पार्टिक्युलेट मैटर (पीएम) प्रदूषण को 20-30% तक कम करें।
2. Switch Delhi Campaign: दिल्ली सरकार ने 2021 में शुरू किया, इस अभियान का मकसद है शहर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देना। इस अभियान में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के खरीदने के लिए भरपूर आन्स्तिमुल है, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगवाने का प्रसार, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के फायदे को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान शामिल है।
3. Green Delhi App:दिल्ली सरकार ने एक मोबाइल एप डेवेलप किया है जिससे नागरिक एयर क्वालिटी के वायलेशंस को रिपोर्ट कर सकते हैं और शहर की हवा को सुधारने के इरादों की प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।
4. Pusa Bio-Decomposer:भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने डेवेलप किया है, यह माइक्रोबियल सॉल्यूशन फसल के रेजिड्यू को तोड़ने और खेती से आने वाले प्रदूषण को रोकने में मदद करता है, जो दिल्ली की हवा को गंदा करने का बड़ा कारण है।
5. Smog Towers: दिल्ली सरकार ने शहर में कुछ स्मॉग टावर्स लगाए हैं एयर प्रदूषण को कम करने के लिए। ये टावर्स एडवांस्ड एयर प्यूरिफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं हवा से पॉल्यूटेंट्स को हटाने के लिए। Read Here
6. Pollution Under Control (PUC) Certificates: दिल्ली सरकार ने शहर के सभी वाहनों के लिए पीयूसी सर्टिफिकेट्स अनिवार्य बना दिए हैं। ये सर्टिफिकेट्स उन वाहनों को दिए जाते हैं जो निर्धारित एमिशन स्टैंडर्ड्स को मीट करते हैं और इसका उद्देश्य है वाहन प्रदूषण को कम करके एयर क्वालिटी को सुधारने का।
7. सफर-एयर:एक मोबाइल एप्लिकेशन है जो भारतीय सरकार ने डेवेलप किया है और जो रियल-टाइम एयर क्वालिटी डेटा प्रदान करता है कुछ शहरों के लिए इंडिया में, इंक्लूडिंग दिल्ली। इस एप्लिकेशन में एयर क्वालिटी लेवल्स के आधार पर हेल्थ एडवाइजरीज़ भी दी जाती हैं।
8. कृतिम बरसात:सरकार ने कृतिम तकनिकी से बरसात करवाने की योजना की है, हालंकि ये प्रदूषण कम करने मे कारगर साबित होगा इसका कोई सबूत नहीं है। पर ये कुछ लेवल तक राहत ज़रूर दे सकता है। Read Here
9. ऑड-ईवन रूल:2016 में ऑड-ईवन रूल जारी किया गया था, जिसके अनुसार एक दिन केवल ओड नंबर वाली गाडी चलायी जा सकती है और उसके अगले दिन इवन नंबर वाली ही गाडी चलायी जा सकती है, जिस से ट्रैफिक 50% तक कम हो गया था, पर इसका सच में प्रदूषण पर कोई असर पड़ा है या नहीं इसका कोई सबूत नहीं मिल पाया है।

 

 

लोगों द्वारा की गयी पहल

वायु प्रदूषण से निपटने में नागरिकों की भागीदारी के कई उदाहरण हैं। यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

People cleaning garbage from the beach

1. Green Team- Delhi

भारत के दिल्ली में, ग्रीन दिल्ली टीम के नाम से जाने जाने वाले नागरिकों का एक समूह एक दशक से ज्यादा टाइम से शहर में हवा की क्वालिटी में सुधार करने के लिए काम कर रहा है। ग्रीन दिल्ली टीम ने कई पहल विकसित की हैं, जिनमें एक मोबाइल ऐप शामिल है जो नागरिकों को हवा की क्वालिटी के उल्लंघन की रिपोर्ट करने की इजाज़त देता है और वायु प्रदूषण के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अभियान शामिल है।

2. Clean Air India Movement (CLAIM) 

Blueair की ये परियोजना, जो शहर में हवा प्रदूषण को कम करने में लगे हैं। 2015 से CLAIM ने हवा प्रदूषण के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने, नीति में परिवर्तन के लिए समर्पण करने, और हवा प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों पर अनुसंधान को समर्थन करना जैसे कार्यक्रम चलाए हैं।

3. Clean Air Asia

एक क्षेत्रीय जाल है संगठनों का जो एशिया में हवा की गुणवत्ता को सुधारने में लगे हैं। क्लीन एयर एशिया ने कई शहरों में, जिसमें दिल्ली भी शामिल है, नागरिकों और सरकारों के साथ मिलकर हवा प्रदूषण नियंत्रण के रास्ते तैयार किए हैं।

 

दिल्ली की बाकी देशों से तुलना

दिल्ली लगातार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। 2022 में, शहर का औसत वार्षिक PM2.5 लेवल 110 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (μg/m3) था, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 5 μg/m3 की सुरक्षित सीमा से 10 गुना ज्यादा है।

यहां दिल्ली की हवा की क्वालिटी की अन्य वैश्विक शहरों के साथ तुलना की गई है:

शहरलेवल (μg/m3)
दिल्ली, भारत110
लंदन, ब्रिटेन10
पेरिस, फ्रांस15
न्यूयॉर्क सिटी, अमेरिका9
टोक्यो, जापान8

उन शहरों की सफलता की कहानियां जिन्होंने प्रभावी रूप से वायु प्रदूषण का समाधान किया है

दुनिया भर के कई शहरों ने वायु प्रदूषण को सफलतापूर्वक संबोधित किया है। यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

 

  • बीजिंग, चीन:

pollution in Beijing China

बीजिंग कभी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक था। हालांकि, चीनी सरकार ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई उपाय लागू किए हैं, जिनमें सख्त उत्सर्जन मानक, सार्वजनिक परिवहन में निवेश और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना शामिल है। नतीजन, हाल के वर्षों में बीजिंग की हवा की क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है। 📰 यहाँ पढ़े

 

  • लॉस एंजलिस, अमेरिका:

pollution in Los Angels America

लॉस एंजिल्स में वायु प्रदूषण की समस्याओं का एक लंबा इतिहास है। हालांकि, शहर ने हाल के दशकों में वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह कई कारकों के कारण है, जिनमें सख्त उत्सर्जन मानक, सार्वजनिक परिवहन में निवेश और स्वच्छ ऊर्जा टेक्नोलॉजीज़ को बढ़ावा देना शामिल है। 📰 यहाँ पढ़े

 

  • लंदन, ब्रिटेन:

pollution in London

लंदन ने भी हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह कई उपायों के कारण है, जिनमें एक कंजेशन चार्ज की शुरूआत, सार्वजनिक परिवहन में निवेश और स्वच्छ ऊर्जा टेक्नोलॉजीज़ को बढ़ावा देना शामिल है। 📰 यहाँ पढ़े

 

Conclusion

टेक्नोलॉजी या कह लें तकनीक दिनों दिनों दिन विकसित होती जा रही है, इस बदलती हुई तकनीक में शायद हमारे इस काले अँधेरे के जवाब भी छुपे हुए है। आज की टेक्नोलॉजी हवा में मौजीद प्रदूषण की निगरानी और भविष्यवाणी करती है, ताकि आगे आने वाले समय में सही फैसले लिए जा सकें और जरूरत के मुताबिक कदम उठाए जा सकें।

एयर प्यूरीफायर और स्क्रबर्स जैसी तकनीक कुछ हद तक हवा को साफ़ बनाने की कोशिश करती है, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट जैसी इलेक्ट्रिक गाड़िया प्रदूषण से कुछ हद तक ज़रूर लड़ सकती है।

लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है की टेक्नोलॉजी हमारे लिए काम करती है पर उसके लिए हमें भी कदम उठाने पड़ेंगे। नई तकनीकों को सही तरह से इस्तेमाल करके, दिल्ली अपनी हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार कर सकती है और अपने निवासियों के लिए एक स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य बना सकती है।

 


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