Ramdev Baba Misleading Ad Case: कैसे Misleading Ads हमें गुमराह करते है?

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Ramdev Baba Misleading Ad Case: कैसे Misleading Ads हमें गुमराह करते है?

हाल ही में, भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु रामदेव द्वारा संस्थापित पतंजलि आयुर्वेद की एड्स की गतिविधियों पर टेंपरेरी बैन लगाया है। यह कदम ऐड में दिए गए उनके प्रोडक्ट्स के असर के बारे में किए गए मिसलीडिंग दावों के कारण हुआ है।

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अक्सर दिखाई देने वाले Misleading Ads

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1. Health Claims: पतंजलि मामले के अलावा, बार ऐसी ऐसी दवाई या प्रॉडक्ट की एड्स देखी जा सकती है, जो दावा करती है इतने कम समय में आपकी हाइट बढ़ा देंगे, आपको मोटे से पतला और पतले से मोटा बना देंगे। गंजापन दूर कर देंगे तो शक्ति बढ़ा देंगे। अजीब अजीब से यकीन न किए जाने वाले क्लेम इन मिसलीडिंग एड्स में किए जाते है। एक सर्वे की माने तो, 70% भारतीयों को Covid-19 के दौरान मिसलीडिंग एड्स का सामना करना पड़ा था। कुछ लोगों को तो 24 महीनों में 10 से भी ज्यादा ads देखने को मिले थे।

2. Food और Beverages: खाद्य और पेय इंडस्ट्री में मिसलीडिंग एड् आमतौर पर प्रोडक्ट्स की पोषण मूल्य को बढ़ावा देते हैं या उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में मिसलीडिंग दावे करते हैं। ये प्रथाएं unhealthy dietary habits को बढ़ावा देती हैं और बुरे स्वास्थ्य नतीज़ों का कारण बन सकती हैं। The Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) को 32 ऐसे नए केस मिले थे, जहां फूड बिजनेस मिसलीडिंग एडवरटाइजमेंट नॉर्म्स को तोड़ रहे थे।

3. Beauty और Cosmetics: फेयर एंड लवली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिनके एड्स में अक्सर एक काली लड़की दुखी और असफल दिखाई जाती, तो वही गोरी लड़की खुश और सफल। ऐसे ही लडको में लड़कियों में अजीब अजीब से दावे कर ये कम्पनी मिसलीडिंग ऐड्स से अपने प्रोडक्ट्स बेचती है।

4. Financial Services: अक्सर ऐसे एड्स देखे जाते है जो केवल 3 दिन में आपको अमीर बनाने का वादा करते है। उनके नीचे बेहद छोटा सा लिखा रहता है, को यह वित्तीय जोखिम के अधीन है, जिसे जल्दी जल्दी बोला जाता है और अक्सर लोग सुन भी नही पाते। इस से लोग नुकसान और कर्ज में दब जाते है।

क्या है यह पतंजलि मिसलीडिंग ऐड्स केस:

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने 2020 में एक याचिका दायर की थी, जिसमें रामदेव और पतंजलि पर भ्रामक एड् प्रसारित करने का आरोप लगाया गया था। इन एड्स में कथित तौर पर evidence-based medicine की निंदा करते हुए और आधुनिक चिकित्सा उपचारों के इस्तेमाल को नकारते हुए अपने प्रोडक्ट्स से बहुत सी बीमारियों का इलाज करने का दावा किया गया था।

इसके अलावा, पतंजलि को राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के खिलाफ एक दिवकार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया।

नवंबर 2023 में, सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को मिसलीडिंग और भ्रांतिकारी दावों की तरफ ध्यान दिया और जनवरी 2024 में पतंजलि ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह एड् रेगुलेशन का पालन करेगी। हालांकि, वादों के बावजूद, अदालत ने मिसलीडिंग एड्स के ज्यादा मामलों का पता लगाया और फरवरी 2024 में टेंपरेरी बैन लगा दिया गया है।

रामदेव बाबा का मिसलीडिंग एड् का मामला भारत में विज्ञापन मानकों के सख्त रेगुलेशन और एनफोर्समेंट के लिए एक चेतावनी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पहुंच की सराहना की जा सकती है, मिसलीडिंग एड् के व्यापक मुद्दे को संबोधित करने के लिए रेगुलेटरी बॉडीज, इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स और कंज्यूमर्स के ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।

एडवरटाइजर्स को उनके दावों के लिए अकाउंटेबल करने और एड् में ट्रांसपेरेंसी और ट्रेथफुलनेस को प्रोत्साहित करके। भारत एक ऐसे बाज़ार को बढ़ावा दे सकता है जो कंज्यूमर वेलफेयर और विश्वास को प्राथमिकता देता है।


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