Reality of Reels: डाल रही है इन्स्ताग्राम रील आप पर बहुत बुरा असर 

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Reality of Reels: डाल रही है इन्स्ताग्राम रील आप पर बहुत बुरा असर 

शोर्ट वीडियोस के कारण सोफिया अंसारी के 10.3 मिलियन फॉलोअर है, तो वही शशि पूनम के 2.8 मिलियन, नेहा के 4.5 मिलियन। इनमें से कुछ आदमी भी है, एरिक, टेलर, जेम्स इनके भी मिलियंस में फॉलोअर्स है। और कमाल की बात यह है की, यह लोगों कुछ नहीं करते।

इन लोगों के इतने सारे फॉलोअर होने के कारण, आज के युवा को लगता है, की आखिर हम रात रात भर क्यों पढ़े? हम दिन-रात क्यों मेहनत करें? जब असल में पैसे कमाने और पॉपुलर होने के लिए कुछ करना ही नहीं पड़ता है।

शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म केवल इतना ही खतरनाक नहीं है।

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पर्सनेलिटी पर नेगेटिव असर

इस तरह की शॉर्ट वीडियो आपकी पर्सनालिटी पर नेगेटिव इफेक्ट डालती है। अब वो दिन दूर नहीं जब कंपनी वाले समय के साथ इसे टाइम ब्लॉक भी कर देंगे, जैसे PUBG को एक टाइम ब्लॉक में बांध दिया है।

वैसे यह शॉर्ट विडियोज हम पर इस तरह के नेगेटिव इफेक्ट डालती हैं।

1. हो रहा है Attention Span कम

attention span

Attention span का मतलब होता है, किसी बात पर फोकस करने को लिमिट। चूंकि ज्यादातर यह केवल 1 मिनट की ही वीडियो होती है, जिसे आप देखे जा रहे हो देखे जा रहे हो। आधे घंटे से तीन-चार घंटे कब बीत जाते है पता ही नहीं चलता। जिस से आपका अटेंशन स्पैन कम हो गया है। मतलब कि अब आप किसी कॉम्प्लेक्स चीज़ को समझने की कोशिश करोगे तो आप समझ नहीं पाओगे, क्योंकि आपका अटेंशन तुरंत चला जाएगा आपका फोकस तुरंत चला जाएगा।

शॉर्ट वीडियो तरल आपको तुरंत संतुष्टि देती है, जबकि कॉम्प्लेक्स चीजें को समझने में टाइम लगता है, तो आपका वो पेशेंस लेवल अब खत्म हो चुका है। अब आपको एक मिनट में चाहिए वो सेटिस्फैक्शन, और जब वो सेटिस्फैक्शन नहीं मिलता तो आप तुरंत क्विट कर दोगे।

अगर आप शॉर्ट वीडियो देखने के एडिक्ट हो, तो आप पाएंगे कि आमतौर पर आप नॉर्मल कन्वर्सेशन में फेल हो जाते हो। और इसी तरह आप अपने रिश्तों में भी जल्दी अपने आपको फ्रस्ट्रेट पाते हो।

आप डीप रीडिंग महक कर पाओगे, लॉन्ग वीडियो तक नहीं देख पाओगे, बल्कि छोटी–मोटी बफरिंग या स्लो नेट भी आप संभाल नहीं पाओगे। कुल मिला कर, आपके अंदर।का फोकस अब खत्म हो चुका है।

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2. Low Education Value

यह शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म आपको लो एजुकेशन वैल्यू देते हैं। कुछ शॉर्ट्स वीडियो आपको 1 मिनट में प्रोपर एजुकेशन देने की कोशिश करते है, लेकिन 1 मिनट में आपको प्रॉपर ज्ञान दिया ही नहीं जा सकता। वो बताई गई बातें केवल अधूरी जानकारी होंगी, और अधूरी जानकारी से बेहतर है की जानकारी हो ही नहीं।

ये शॉर्ट वीडियो केवल तीन चीजों पे चलता है- ह्यूमरस, फनी, या फिर शॉक वैल्यू, यानी दूसरो को हैरानी में डाल देना। इन बातों पर आपको यह वीडियो दिखाई जाती है, और आपको बस उतने में ही मजा आ जाता है। इसमें एजुकेशन दी ही नहीं जा सकती।

अब मान लो, मैं किसी स्मार्टफोन का रिव्यू करना चाहता हूँ, तो हद से हद मैं स्पेसिफिकेशन बता दूंगा, अच्छी बुरी बातें आखिर एक मिनट में सब कैसे गा पाऊंगा। तो इस तरह की।वीडियो में मैं आपको सिर्फ एक लिमिटेड चीज बता सकता हूँ, ज्ञान नहीं दे सकता।

अगर ज्ञान देने पर आया तो वो आधी जानकारी जाएगी मजा नहीं आएगा, आप देखोगे नहीं, चलेगा नहीं। तो जो बताने वाला इन्फ्लुएंन्सर है, जो आपको एक्चुअल नॉलेज देना चाहता है, वो खुद भी कोई फैक्ट चेक करने वाला नहीं हैं। आपको तुरंत हंसाने, रुलाने दिया की ही वीडियो बना पाएगा। तो ऐसे में यहां पर आपको ठीक से ज्ञान लेना है, तो आपको लॉन्ग वीडियो ही देखनी पड़ेगी। शॉर्ट वीडियो की एजुकेशनल वैल्यू बहुत जीरो होती है ना कोई सिखाने वाला बचेगा ना कोई सीखने वाला बचेगा।

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3. Disinformation और Misinformation

Disinformation और Misinformation

और तीसरा सबसे खतरनाक, इन शॉर्ट विडियोज से मिस इंफॉर्मेशन या डिस इंफॉर्मेशन जाने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। 1 मिनट में अगर किसी को कोई बात बतानी है, कोई जानकारी देनी है, तो 1 मिनट में कॉम्प्लेक्स चीजें तो बता ही नहीं जा सकती।

ऐसे में बताने वाला व्यक्ति एक छोटा रास्ता निकाल लेता है, या तो वो ओपिनियन दे देता है, या बात को ओवर सिंपलीफाई कर देता है। या फिर आधी बातें बता देता है, या फिर चौका देता है। ऐसे में बताने वाला आपको आधी जानकारी देगा जो कि मिस इंफॉर्मेशन हो जाती है।

एलइसके अलावा कई बार यह डिसइंफॉर्मेशन का रूप भी ले लेती है। कई बार आपने देखा होगा, वायरल हो चुकी शॉर्ट वीडियो, जिसमे कही से क्लिप काट कर लगा दी और ऐसे में लोग उसे गलत समझ लेते है, जबकि असल में ऐसा होता भी नहीं।

जोमेटो के लड़के को एक लड़की ने पीटा था, फिर बाद में पता चला कि बात ही कुछ और थी, या फिर एक बंदे को तो जेल ही हो गई, क्योंकि छोटी सी क्लिप काट के डाल दी। फिर जब पूरी क्लिप पता चली तो मांजरा कुछ और ही था।

ऐसे ही कई हजारों केस जहाँ पर क्लिप को छोटा सा डाला जाता है, छोटी सी बात बताई जाती है। ऐसे में वो मिस इंफॉर्मेशन और डिस इंफॉर्मेशन का रूप ले लेती है। यह देश में दंगे भी करा देती है, क्योंकि 1 मिनट की वीडियो को देखने के बाद, लोग चेक ही नहीं करना चाहेंगे।

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4. Super Addictive

यह छोटी वीडियो, असल में आपके डोपामाइन को ट्रिगर करती है, जिस से आपको तुरंत एक सैटिसफैक्शन की अनुभूति होती है। इस ही तरह आप एक एडिक्शन को तरह इन वीडियोस को देखे जाते हो, देखे जाते हो, और एंडलेस देखे ही जाते हो। इसका एल्गोरिदम ही कुछ ऐसा बनाया जाता है, की यह कभी ख़तम ही ना हो।

मै आपको एक चिप्स का उदाहरण देना चाहता हूँ, चिप्स से भी आपके डॉपमीन ट्रिगर होता है। आपको एक पैकेट चिप्स दे दिया जाए, तो अब आप एक चिप्स खाओ, तो उसके बाद अब आप रुक नहीं सकते। आपको एक और खाना है, और ऐसे ही खाते-खाते कब आप सारे चिप्स खा जाएं आपको पता ही नहीं चलेग, लेकिन आपको सेटिसफेक्शन  तब भी नहीं होगा।

कुछ इसी तरह से यह शॉर्ट वीडियो भी काम करती है। करता है। यह सुपर एडिक्टिव शॉर्ट वीडियो आपके डॉक्यूमेंट को ट्रिगर करती है जिससे आप 3 घंटे नहीं बल्कि 6–6 घंटे भी देख सकते हो। और जब तक आपको एहसास होता है, कि आपने अपना सारा समय इसे देखते ही बिता दिया है, जिसके बाद आप अफसोस करने लगते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी, जब पहले सबसे पहली सिगरेट LA कंपनी द्वारा लॉन्च की गई थी, तो यह नहीं बताया गया, कि ये एडिक्टिव या नुकसानदेह है, बस लॉन्च कर दिया। बाद में पता चला, कि यह तो बहुत ही नुकसान देती है। जिसके बाद फिर सिगरेट पर रिस्ट्रिक्शन लगाई और कई देशों में तो सिगरेट बैन किए गए। पहली सिगरेट तो एक बच्चा भी पी रहा था। उस समय लोग स्टाइल के कारण सिगरेट पीते हैं, नुकसान का पता चल जाने के बाद भी वो इसकी आदत नहीं छोड़ पाए।

यह रील या शॉर्ट्स इतने एडिक्टिव है, की कई जगह तो इसके बारे में झगडे-दंगे भी हुए है। कई खबर तो ऐसी भी आई है, जहाँ एक औरत को Reel बनाने से जब रोका गया, तो उसने अपने पति पर हमला कर दिया। इस ही तरह, कई बच्चो ने अपने पैरेंट्स पर हमला किया।

ये सोच के ही खतरनाक लगता है कि, किसी को जब केवल विडियो बनाने से रोका जाएँ, तो वो इतना खतरनाक इतना हो सकता है। एक सिंपल सी तो बात है समझा दो, लेकिन नहीं। अब यदि आप एक बच्चे को कहो की यह कमीज मत पहनो और तुम डांट दो, तो बच्चा नहीं पहनेगा। लेकिन एक औरत को रोक दिया वीडियो बनाने से उसने हमला कर दिया अपने पति पर, तो ये कोई नॉर्मल बात नहीं है।

जैसे किसी को ड्रग्स लेने से मना कर दो, तो वो भी शायद इसी तरह का व्यवहार करते है, हालांकि मैं इसे ड्रग से रिलेट नहीं कर रहा हूँ, लेकिन मैं बता रहा हूँ कि शॉर्ट वीडियो का जो नेचर है, वो कहीं ना कहीं इसी तरह की लत है।

इसी तरह ये रील्स भी एडिक्टिव है, समय के साथ इसके बारे में और डिटेल आएगी जहाँ पर पता चलेगा कि ये एडिक्टिव है। और फिर शायद इसके बाद PUBG की तरह इसमें भी टाइम ब्लॉकिंग का फीचर आए।

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5. टैलेंटेलेस लोगों का राज

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सबसे बुरी बात तो यह है, कि, यहां पर सोफिया अंसारी, शशि पूनम, नेहा, एरिक, टेलर और बाकी जो भी हैं, हजारों टैलेंटलेस लोग वीडियो बना रहे हैं, जिसमें वो ऐसा कुछ खास नहीं कर रहे, केवल शरीर का प्रदर्शन और कुछ आसान से डांस।

जब पहले YouTube पर वीडियो बनती थी, तो वह प्रॉपर रिसर्च के साथ, फैक्ट चेक कर वीडियो बनाई जाती थी। इन वीडियोस में आपको एक अच्छी एजुकेशन मिलती थी, जिससे आपकी प्रोडक्टिविटी और नॉलेज दोनों बढ़ती थी। इस से न केवल देश की ग्रोथ होती थी बल्कि आपकी पर्सनल ग्रोथ भी बढ़ती थी।

इस मामले में मैं ध्रुव राठी की वीडियोस का उदाहरण लेना चाहूँगा। उनकी लास्ट वीडियो का रेफरेंस लेते हुए, जहाँ पर उनकी टीम ने 6–7 दिन की गहरी रिसर्च की, तब जा कर उनकी वीडियो को 9.6 मिलियन व्यू मिले हैं। और यहां पर सोफिया अंसारी मोहतरमा, इन्होंने कुछ नहीं बस 1 मिनट का सामी सामी पर डांस कर दिया तो इनको मिल गए 13.6 मिलियन व्यू। और ऐसे ही 50–60 मिलियन व्यू हैं, जिसमें यह कुछ कर भी नहीं रहे हैं केवल नाचने के।

अब शायद आप कहें डांस तो बढ़िया करते हैं, अरे डांस तो प्रभुदेवा कही ज्यादा बढ़िया करते है, उनके तो इतने फॉलोवर ही नहीं। इतना ही नहीं, कई सारे कोरियोग्राफर, जो इतना अच्छा डांस अच्छा करते हैं, लेकिन उनके पास फॉलोअर ही नहीं हैं। लेकिन यहां पर इनके फॉलोअर मिलियंस में हैं, क्यों? क्योंकि सिर्फ शरीर का प्रदर्शन करना है, इसके अलावा कुछ नहीं, जिस से फॉलोअर और पैसा दोनों मिलेंगे।

ऐसा में युवा क्यों सोचे, कि हम14-14 घंटे पढ़ाई करेंगे, हम यह बनेंगे, हम वह बनेंगे। पढ़ कर भी उनको नौकरी नहीं मिल रही है, तो ऐसे में वो सोचेंगे ही यही बढ़िया है। 2 स्टेप पर नाच कर दिखाना है, किसी और की ऑडियो पर मुंह चलाना है, ना टैलेंट की जरूरत, ना एफर्ट की। तो क्यों होंगे वो पढ़ने के लिए प्रोत्साहित।

आज हर घर में हर कोई वीडियो बना रहा है, क्यों? क्योंकि कुछ करना नहीं है। ऐसी वीडियो देख कर यह लोग भी कहते हैं, यह तो हम भी कर देंगे, इसमें क्या है लिप्सिंग ही तो करनी है, छोटा सा ठुमका मार देना है, अपने बदन दिखा देना है। तो ऐसे में कंटेंट की क्वालिटी क्या होगी आप उसका अंदाजा लगा सकते हैं।

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6. बच्चों के लिए नहीं है इंस्टाग्राम

यदि आपके घर में बच्चे भी रील चला रहे है, तो बहुत जरूरी है कि आप बच्चों के हाथ से फोन छीन लें। क्योंकि बच्चों में वो पोटेंशियल ही नहीं होता, कि वो अपने आप को समझा पाएं। एक सीमा होती है, जहाँ पर बच्चे उसे कंट्रोल नहीं कर सकते, लेकिन बड़े फिर भी कंट्रोल कर सकते हैं।

तो यदि, 13 साल से छोटे बच्चे आपके घर में शॉर्ट वीडियो देख रहे हैं, तो पहले तो उनसे फोन झपट लो, अपना नुकसान तो आप कर रहे हो, कम से कम उनका मत करो।

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कैसे बचें इसके इफेक्ट से?

इसका असर धीरे-धीरे आपकी ग्रोथ, करियर, फोकस, और प्रोडक्टिविटी पर पड़ता है। और इस ही तरह यह किसी देश की ग्रोथ में सीधा-सीधा नजर आता है। क्योंकि बच्चे पढ़ना नहीं चाहते, कुछ हम करना नहीं चाहते, शॉर्ट वीडियो इस हद तक लोगों की नसों में घुस गया है। समय के साथ नेगेटिव इफेक्ट दिखाएगा, कई घरों में तो ऐसे इफैक्ट आपको देखने को भी मिले होंगे।

यदि आपको लगता है की आपको आदत पड़ गई है, मैं तो 5–5 घंटे 7-7 घंटे इसी में लगा रहता हूँ, अब मैं क्या करूं?तो, आप सिर्फ इसमें 2-3 तरीके अपना सकते हो।

  1. आपको रील या शॉर्ट देखने का अपना टाइम ब्लॉक करना होगा। आपको यह निश्चय करना होगा कि मैं, आधे घंटे या 1 घंटे ही रील देखूंगा उस से ज्यादा नहीं।
  2. रील देखने के बाद आपको किसी प्रकार की डीप रीडिंग या डिटेल्ड नॉलेज वाली वीडियो देखनी होगी।
  3. मेडिटेशन आपको काफी मदद कर सकता है।
  4. आपको मल्टीटास्किंग से बचना होगा, सिर्फ एक काम पर ध्यान लगा कर काम करें, जिस से एक बैलेंस बना रहें।

तो यह चीज़ें अपना कर आप इस लत से और होने वाले इसके नेगेटिव प्रभाव से खुद को बचा सकते हैं। और आप जो यह सारा दिन खचर–खचर इंस्टाग्राम, यूट्यूब शॉर्ट्स, मौज, चिंगारी पर जो लगे रहते हो ना, 6-6 घंटे 7-7 घंटे, सोफिया अंसारी या सामी सामी देख बावले हुए जा रहे हो, कृपया कर ऐसी चीजों से दूर रहें, और अपने मेंटल हेल्थ का ख्याल रखें।


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