Why Indian Trains Are Crowded: रेल सफर के 2 भारत

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Why Indian Trains Are Crowded: रेल सफर के 2 भारत

इसमें कोई शक नहीं है, Indian Railways भारत की धड़कन है। यह लोगों को आपस में जुड़ता है, और इस बड़े देश में काम कीमत में एक कोने से दुसरे कोने में ले जाता है। पूरी दुनियां में Indian Railways चौथे नंबर पर आता है। इनके पास 126,366 किलोमीटर की पूरी रेलवे पटरी है। और लगभग 7,335 से ज्यादा स्टेशन है।

लेकिन, ट्रेन से यात्रा करने का अनुभव आपके द्वारा चुनी गई क्लास के आधार पर बिल्कुल अलग हो सकता है। आइए इस बात पर गौर करें कि भारतीय ट्रेनों में अक्सर इतनी ज्यादाभीड़ क्यों होती है, क्या हमारे पास ट्रेन काम है?

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Indian Railways के 2 भारत

1. AC का कंफर्ट जोन:

  • यदि आपने कभी air-conditioned (AC) कोच में सफर किया है, तो आपको पता होगा कि यह दूसरे कोच की तुलना में आरामदायक सफर देता है। यात्रियों को गद्देदार सीटें, क्लाइमेट कंट्रोल और बेहतर साफ सफाई की सुविधा मिलती है।
  • लेकिन यहां एक समस्या है: एसी कोचों की कीमत ज्यादा होती है, जिससे वे मुख्य रूप से उन लोगों के लिए सुलभ हो जाते हैं जो अतिरिक्त कीमत दे सकते हैं।

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2. General और Sleeper Coaches:

  • ज्यादातर भारतीय रेल यात्री जनरल और स्लीपर कोच पर निर्भर रहते हैं। ये कोच अधिक किफायती हैं लेकिन अक्सर भीड़भाड़ वाले होते हैं।
  • एसी कोचों में ज्यादा भीड़भाड़ की अनुमति नहीं है, इसलिए जो लोग एसी टिकट नहीं खरीद सकते, वे खतरनाक रूप से खचाखच भरे जनरल और स्लीपर कोचों में यात्रा करते हैं।
  • पीक आवर्स के दौरान स्थिति विशेष रूप से गंभीर होती है जब ट्रेनों में उनके डिज़ाइन की तुलना में कहीं अधिक यात्री सवार होते हैं।

Why Indian Trains Are Crowded: रेल सफर के 2 भारत

ट्रेन में इतनी भीड़ क्यों?

1. कम किराया:

  •  भारतीय रेलवे रियायती टिकट कीमतों देता है, जिससे लाखों यात्री परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में ट्रेनों की ओर आकर्षित होते हैं।
  • हालांकि यह ट्रेन यात्रा को सुलभ बनाता है, लेकिन इससे रेलवे के फाइनेंस पर भी दबाव पड़ता है, जिससे नई ट्रेनों और मार्गों पर कम निवेश होता है।
  • परिणाम? खतरनाक भीड़भाड़.

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2. कोचों की कम संख्या:

  • पिछले कुछ सालों में स्लीपर और जनरल कोचों की संख्या कम हो गई है।
  • परिणामस्वरूप, इन कोचों में भीड़भाड़ का खामियाजा कम आय वाले व्यक्तियों को भुगतना पड़ता है, जो एसी टिकट या दूसरी तरह परिवहन का खर्च वहन नहीं कर सकते।

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3. टिकटिंग नियम और दंड:

  • जटिल टिकटिंग नियम और अपर्याप्त दंड तंत्र अराजकता में योगदान करते हैं।
  • यात्री अक्सर बिना रिजर्वेशन के यात्रा करते हैं, जिससे भीड़भाड़ हो जाती है।

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4. अनुसूची समायोजन:

  • मौजूदा ट्रैक पर अधिक ट्रेनों को रखने के लिए ट्रेन शेड्यूल को अक्सर एडजस्ट किया जाता है।
  • इससे भीड़भाड़ हो सकती है, खासकर पीक आवर्स के दौरान।

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लोगों की कहानी

  1. सूरत में ट्रेन में ज्यादा भीड़ में सास घुटने की वजह से एक 30 साल के व्यक्ति की मृत्यु हो गई, और साथ में 4 लोग बेहोश तक हो गए।
  2. मुंबई में भीड़ से भरी ट्रेन में गिरने पर 3 लोगों की मौत हो गई।
  3. इस ही तरह भानपुर में एक औरत को भी ट्रेन से गिरने पर मौत हो गई।

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ऐसे कई किस्से है, जहां कई लोगों ने अपनी जान खोई है। और इसके साथ साथ ऐसे कई लोग है, रेल में हुए हादसे के कारण आजीवन किसी अपंगता के साथ जीना पड़ता है। इसके अलावा रोज़ लोग बेहोश होते है, कुछ लोग तो बाथरूम तक में सफर करने को मजबूर हो जाते है।

जहां एसी कोच आराम देते हैं, वहीं जनरल और स्लीपर कोच जनता के संघर्ष को उजागर करते हैं। जब हम रेल की सवारी करते हैं, तो आइए याद रखें कि हर भीड़ भरे डिब्बे के पीछे एक कहानी छिपी होती है।

चूंकि जब से भारतीय रेलवे का प्राइवर्टाइजेशन हो चुका है, इसके लिए, सरकार को बेहतर कदम उठाने होंगे। न की सिर्फ इलेक्शन से पहले काम दिखाने के लिया काम किया जाए।

हालांकि जेनरल कोच में अब टिकट की कीमत आधी हो चुकी है, जो की एक तरह से गरीब लोगों के लिए तो बहुत अच्छा है, पर यह जायदा भीड़ को और बुलाता है। बेहतर होगा की और ट्रैक्स के साथ और ट्रेन भी बढ़ाई जाए, क्योंकि इसकी असल जरूरत लोगों को है। फिलहाल लोगों के पास कोई चारा नहीं सिवाय उस खचाखच भरी ट्रेन में घुसने कर सफर करने के।


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